| |

Golden Quadrilateral Project for the development of National Highways was initiated by / राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना किसके द्वारा शुरू की गई थी?

Golden Quadrilateral Project for the development of National Highways was initiated by / राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना किसके द्वारा शुरू की गई थी?

 

(1) P V Narasimha Rao / पी वी नरसिम्हा राव
(2) I K Gujral / आई के गुजराली
(3) Manmohan Singh / मनमोहन सिंह
(4) Atal Bihari Vajpayee / अटल बिहारी वाजपेयी

(SSC CGL Tier-I (CBE) Exam. 06.09.2016)

Answer / उत्तर : –

(4) Atal Bihari Vajpayee / अटल बिहारी वाजपेयी

 

 

Explanation / व्याख्यात्मक विवरण :-

The Golden Quadrilateral project was launched by the then Prime Minister Atal Bihari Vajpayee in 2001.The Golden Quadrilateral is a highway network connecting many of the major industrial, agricultural and cultural centres of India. It is the largest highway project in India and the fifth longest in the world.

One of the achievements of the previous NDA government, 5846 kms. It is the Golden Quadrilateral (GQ) highway. It has been named among the longest highways in the world. It is basically a network of highways that connect the four major metropolitan cities of the country in four directions – Delhi (North), Chennai (South), Kolkata (East) and Mumbai (West) – forming a quadrilateral and hence Its name is Golden Quadrilateral (Golden Quadrilateral).

The ambitious project of the largest highway was started in the year 2001. The project, run by the National Highways Development Project (NHDP) and the National Highways Authority of India (NHAI), was initiated by the then Prime Minister Atal Bihari Vajpayee. The planning of the project was completed in the year 1999 but the construction work officially started in 2001. Although it was estimated to be completed by 2006, it was actually commissioned in January 2012. The Golden Quadrilateral project involves the construction of new express highways, including expansion and repairs to four or six lanes to refurbish existing highways.

Major Cities Under Golden Quadrilateral Highways

The Golden Quadrilateral provides efficient transport links between major cities of India such as New Delhi; Jaipur, Udaipur, Ajmer (Rajasthan); Ahmedabad, Gandhinagar (Gujarat); Mathura, Varanasi, Agra, Kanpur (Uttar Pradesh); Mumbai and Pune (Maharashtra); Bangalore (Karnataka); Visakhapatnam (Andhra Pradesh); Chennai (Tamil Nadu); Bhubaneswar (Orissa), Kolkata (West Bengal) etc.

The four squares of the golden quadrilateral

Section-1: It connects National Highway 2 (NH 2) from Delhi to Kolkata. Total extension 1454 km It is extended to states like Delhi, Haryana, Uttar Pradesh, Bihar, Jharkhand and West Bengal. Major cities include Delhi, Mathura, Faridabad, Agra, Allahabad, Firozabad, Kanpur and Varanasi.

Section II: It covers NH 6 from Kolkata to Chennai, NH 60 (Kharagpur to Balasore) and NH 5 (Balasore to Chennai). Total section extension 1684 km Is. The states include West Bengal, Andhra Pradesh, Orissa and Tamil Nadu.

Section-III: TOTAL EXTENSION 1290 KM It consists of NH 4 (Mumbai to Bangalore), NH 7 (Bangalore to Krishnagiri, Tamil Nadu) and NH 46 (Chennai near Krishnagiri). The states include Maharashtra, Karnataka, Andhra Pradesh and Tamil Nadu.

Section IV: Covers parts of National Highway 8 (Delhi to Kishangarh), National Highway 79A (Ajmer Bypass), NH 79 (Naseerabad to Chittorgarh) and NA 76 (Chittorgarh to Udaipur), this section extends 149 km. m. Is. The states include Maharashtra, Gujarat, Rajasthan, Haryana and New Delhi. Connects major cities like Delhi, Ajmer, Udaipur, Gurgaon, Jaipur, Gandhinagar, Ahmedabad, Vadodara, Surat and Mumbai.

Golden Quadrilateral Keys Features
  • It is the biggest highway project in the whole of India.
  • It is the fifth longest highway project in the world.
  • The total length of the Golden Quadrilateral is 5,846 km.
  • The Golden Quadrilateral passes through the 13 states of India.
  • The Golden Quadrilateral only constitutes the national highways of the country and not the state highways and rural urban roads.
  • The project is estimated to cost Rs 600 crore, but it was a project that was completed (against the estimated cost) of around $58 billion.
Benefit to the country
  • Provides fast transport network between major cities and ports
  • Provides connectivity to major agricultural, industrial and cultural centers of India
  • Provides a common movement of goods and people within the country
  • Enables industrial growth and job creation in small towns through access to various markets
  • Farmers can transport their produce to major cities and towns for sale and export, and where there is less wastage and loot.
  • Greater economic growth through manufacturing and indirect demand for steel, cement and other building materials.
  • Will encourage truck transport.

स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना 2001 में तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा शुरू की गई थी। स्वर्णिम चतुर्भुज एक राजमार्ग नेटवर्क है जो भारत के कई प्रमुख औद्योगिक, कृषि और सांस्कृतिक केंद्रों को जोड़ता है। यह भारत की सबसे बड़ी राजमार्ग परियोजना है और दुनिया की पांचवीं सबसे लंबी है।

पिछली एनडीए सरकार की उपलब्धियों में से एक 5846 कि.मी. का स्वर्णिम चतुर्भुज (जीक्यू) राजमार्ग है। इसे दुनिया के सबसे लंबे राजमार्गों में नामित किया गया है। यह मूल रूप से राजमार्गों का एक नेटवर्क है जो देश के चार प्रमुख महानगरों को चार दिशाओं – दिल्ली (उत्तर), चेन्नई (दक्षिण), कोलकाता (पूर्व) और मुंबई (पश्चिम) में जोड़ता है – जिससे एक चतुर्भुज बन जाता है और इसीलिए इसका नाम गोल्डन चतुर्भुज (स्वर्णिम चतुर्भुज) है।

सबसे बड़े राजमार्ग की महत्वाकांक्षी परियोजना वर्ष 2001 में शुरू की गयी थी। राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (एनएचडीपी) एवं राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा संचालित इस परियोजना को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा शुरू किया गया था। वर्ष 1999 में इस परियोजना का आयोजन पूरा हुआ था लेकिन निर्माण कार्य आधिकारिक तौर पर 2001 में शुरू हुआ था। यद्पि यह 2006 तक पूरा होने का अनुमान था, परन्तु यह वास्तव में जनवरी  2012  में चालू हुआ था। स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना में नये एक्सप्रेस हाइवे का निर्माण शामिल है, जिसमें मौजूदा राजमार्गों के नवीनीकरण के लिए चार या छह लेन का विस्तार और मरम्मत शामिल है।

गोल्डन चतुर्भुज राजमार्गों के अंतर्गत आने वाले प्रमुख शहर

स्वर्णिम चतुर्भुज भारत के प्रमुख शहरों के बीच कुशल परिवहन लिंक प्रदान करता है जैसे नई दिल्ली; जयपुर, उदयपुर, अजमेर (राजस्थान); अहमदाबाद, गांधीनगर (गुजरात); मथुरा, वाराणसी, आगरा, कानपुर (उत्तर प्रदेश); मुंबई और पुणे (महाराष्ट्र); बैंगलोर (कर्नाटक); विशाखापटट्नम (आंध्र प्रदेश); चेन्नई (तमिलनाडु); भुवनेश्वर (उड़ीसा) कोलकाता (पश्चिम बंगाल) आदि।

स्वर्णिम चतुर्भुज के चारों वर्ग

खण्ड-1: यह राष्ट्रीय राजमार्ग 2 (एनएच 2) को दिल्ली से कोलकाता तक जोड़ता है। कुल विस्तार 1454 कि.मी. है दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों तक विस्तारित हैं। प्रमुख शहरों में दिल्ली, मथुरा, फरीदाबाद, आगरा, इलाहाबाद, फिरोजाबाद, कानपुर और वाराणसी शामिल हैं।

खण्ड II: यह कोलकाता से चेन्नई, एनएच 60 (खड़गपुर से बालासोर) और एनएच 5 (बालासोर से चेन्नई) तक एनएच 6 को कवर करता है। कुल खंड विस्तार 1684 कि.मी. है। राज्यों में पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा और तमिलनाडु शामिल हैं।

खण्ड III: कुल विस्तार 1290 कि.मी. है इसमें एनएच 4 (मुंबई से बेंगलुरु), एनएच 7 (बैंगलोर से कृष्णागिरि, तमिलनाडु) और एनएच 46 (कृष्णागिरी के पास चेन्नई) शामिल हैं। राज्यों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु शामिल हैं।

खण्ड IV: राष्ट्रीय राजमार्ग 8 (दिल्ली से किशनगढ़), राष्ट्रीय राजमार्ग 79 ए (अजमेर बायपास), एनएच 79 (नसीराबाद से चित्तौड़गढ़) और एनए 76 (चित्तौड़गढ़ से उदयपुर) के कुछ हिस्सों को शामिल करता है, यह खंड विस्तार 149 कि.मी. है। राज्यों में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और नई दिल्ली शामिल हैं। दिल्ली, अजमेर, उदयपुर, गुड़ग्राम, जयपुर, गांधीनगर, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ता है|

स्वर्णिम चतुर्भुज की मुख्य विशेषताएँ
  • यह पूरे भारत में सबसे बड़ी राजमार्ग परियोजना है।
  • यह दुनिया की पांचवीं सबसे लंबी राजमार्ग परियोजना है।
  • गोल्डन चतुर्भुज की कुल लंबाई 5,846 किलोमीटर है
  • गोल्डन चतुर्भुज भारत के 13 राज्यों के मध्य से गुजरती है।
  • गोल्डन चतुर्भुज केवल देश के राष्ट्रीय राजमार्गों का गठन करता है, न कि राज्य के राजमार्ग और ग्रामीण शहरी सड़को का।
  • इस परियोजना का अनुमान है कि इसमें 600 करोड़ रुपये खर्च होगें, लेकिन यह एक ऐसी परियोजना थी जो लगभग 58 अरब डॉलर में (अनुमानित लागत के मुकाबले) पूरी हो गयी।
देश के लिए लाभ
  • प्रमुख शहरों और बंदरगाहों के बीच तेज परिवहन नेटवर्क प्रदान करता है
  • भारत के प्रमुख कृषि, औद्योगिक और सांस्कृतिक केंद्रों को संपर्क मार्ग प्रदान करता है
  • देश के भीतर माल और लोगों के एक सामान गति प्रदान करता है
  • विभिन्न बाजारों तक पहुँच के माध्यम से छोटे शहरों में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को सक्षम करता है
  • किसान अपने उत्पाद की बिक्री और निर्यात के लिए प्रमुख शहरों और कस्बों तक पहुँचा सकता हैं, और जहाँ कम अपव्यय और लूट है।
  • इस्पात, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री के निर्माण और अप्रत्यक्ष मांग के माध्यम से अधिक आर्थिक विकास|
  • ट्रक परिवहन को प्रोत्साहन देगा|

Similar Posts

Leave a Reply