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If Hwang Ho is the sorrow of China which river is sorrow of Bihar? / अगर ह्वांग हो चीन का दुख है तो बिहार का दुख कौन सी नदी है?

If Hwang Ho is the sorrow of China which river is sorrow of Bihar? / अगर ह्वांग हो चीन का दुख है तो बिहार का दुख कौन सी नदी है?

 

(1) Damodar river / दामोदर नदी
(2) Koshi River / कोशी नदी
(3) Yamuna river / यमुना नदी
(4) Ravi river / रावी नदी

(SSC CAPFs (CPO) SI & ASI,Delhi Police SI Exam. 05.06.2016)

Answer / उत्तर : – 

(2) Koshi River / कोशी नदी

Explanation / व्याख्यात्मक विवरण :-

 

Koshi River is known as the “Sorrow of Bihar”. It leads to annual floods that affect about 21,000 km2of fertile agricultural lands and impact heavily upon the state’s rural economy. During floods, the average discharge of Koshi increases to 18 times the average, inundating large areas in its spate.

The Kosi River or Koshi River originates from the Himalayas in Nepal and enters Bharat Prajwal via Bhimanagar in Bihar. The floods in this cause a lot of devastation in Bihar, due to which this river is called the ‘Curse of Bihar’. ‘ is called.

If we look at its geographical nature, it will be known that it has expanded 120 km in the last 250 years. Bringing various types of sediments (sand, pebbles) from the high hills of the Himalayas, this river is continuously spreading its area. This river flowing through the plains of northern Bihar makes the entire region fertile. Both Nepal and India have built dams on this river; However, some environmentalists had expressed the possibility of harm from this.

This river is also the cradle of the culture of Mithila region of North Bihar. The areas around Koshi are called Koshi after this.

कोशी नदी को “बिहार का शोक” कहा जाता है। यह वार्षिक बाढ़ की ओर ले जाता है जो लगभग 21,000 किमी 2 उपजाऊ कृषि भूमि को प्रभावित करता है और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भारी प्रभाव डालता है। बाढ़ के दौरान, कोशी का औसत जल प्रवाह औसत से 18 गुना तक बढ़ जाता है, जिससे इसके उफान के बड़े क्षेत्र जलमग्न हो जाते हैं।

कोसी नदी या कोशी नदी नेपाल में हिमालय से निकलती है और बिहार में भीम नगर के रास्ते से भारत प्रज्वल में दाखिल होती है।इसमें आने वाली बाढ से बिहार में बहुत तबाही होती है जिससे इस नदी को ‘बिहार का अभिशाप(बिहार क शोक)’कहा जाता है।

इसके भौगोलिक स्वरूप को देखें तो पता चलेगा कि पिछले 250 वर्षों में 120 किमी का विस्तार कर चुकी है। हिमालय की ऊँची पहाड़ियों से तरह तरह से अवसाद (बालू, कंकड़-पत्थर) अपने साथ लाती हुई ये नदी निरंतर अपने क्षेत्र फैलाती जा रही है। उत्तरी बिहार के मैदानी इलाकों को तरती ये नदी पूरा क्षेत्र उपजाऊ बनाती है। नेपाल और भारत दोनों ही देश इस नदी पर बाँध बना चुके हैं; हालाँकि कुछ पर्यावरणविदों ने इससे नुकसान की भी संभावना जतायी थी।

यह नदी उत्तर बिहार के मिथिला क्षेत्र की संस्कृति का पालना भी है। कोशी के आसपास के क्षेत्रों को इसी के नाम पर कोशी कहा जाता है।

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