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“Panna” is an important place in Madhya Pradesh. It is famous for : / “पन्ना” मध्य प्रदेश में एक महत्वपूर्ण स्थान है। यह इसके लिए प्रसिद्ध है :

“Panna” is an important place in Madhya Pradesh. It is famous for : / “पन्ना” मध्य प्रदेश में एक महत्वपूर्ण स्थान है। यह इसके लिए प्रसिद्ध है :

 

(1) Gold mines / सोने की खदानें
(2) Silver mines / चाँदी की खदानें
(3) Diamond mines / हीरे की खदानें
(4) Iron mines / लोहे की खदानें

(SSC Stenographer (Grade ‘C’ & ‘D’) Exam. 26.09.2010)

Answer / उत्तर : –

(3) Diamond mines / हीरे की खदानें

 

Panna a diamond city how to visit panna madhya pradesh

 

Explanation / व्याख्यात्मक विवरण :-

Panna is famous for its diamond mines. A large group of diamond deposits extends North-East on a branch of the Vindhya Range for 240 km or so, and is known as the Panna group. Diamond mines in Panna are managed under the Diamond Mining Project of National Mineral Development Corporation (NMDC Ltd) of Government of India.

Panna is a historic town in Panna district in the state of Madhya Pradesh, India. It is also the district headquarters. Panna is known for the diamonds found here.

Panna is a mythological city, it is mentioned in Vishnu Purana and Padma Purana from Kilkil region, it is the place of origin of the Vakataka dynasty. Nagvansh’s Kuldevi Padmavati is enthroned by the arrows of the Kilkila river, due to which it was named Padma and later Parana Jhirna and Panna. The city grew in importance in 1675 when Chhatrasal, the ruler of Bundelkhand, made it the capital on the orders of his spiritual master Swami Prannath. Buildings of historical importance located here include the marble-domed Swami Prannath Temple (1795) and the Shri Baldevji Temple. And in the famous Shri Yugalkishore temple of Bundelkhand, there is Ashtasiddha Shaligram Deity of Lord Krishna of the country. The Baldev Temple at Panna is based on the London Palace range. Panna Prannath Temple is the main center of the people of Pranami sect. Mahabharat era Virat Nagar is identified with Barhata here. The municipality was formed here in 1921. Its surrounding areas are mainly part of the erstwhile Panna and Ajaygarh princely states. It also includes a mountainous region called the Panna range, which is a branch of the Vindhya range. In Treta Yuga, Lord Shri Ram passed through Chitrakut from Panna to Powai Tehshil near famous place Brihaspati Kund near Brijpur, Ashram of Sutikshn Rishi near Sarangpur, Ashram of Rishi Agnijih near Badgaon, Agastmuni’s ashram near Saleha, Siddhanath Ashram spent some time. The famous Chaumukhnath Shiva temple is 4 km away from Saleha, the birthplace of Chandragupta’s Guru Chanakya. Kalehi Mata Temple located near Powai Tehshil, the famous hills of Hanubhate Chande, Tendughat are famous places which are beautiful places.

History

Panna is a historical city. This city is located in the northern part of the Indian state of Madhya Pradesh. As the princely state of Bundelkhand, Bundela King Chhatrasal made this city the capital of his kingdom after the death of Aurangzeb (1707 AD). Mughal Emperor Bahadur Shah accepted the power of Chhatrasal in 1708 AD. The buildings of historical importance located in Panna include the marble dome Swami Prannath Temple (1756 AD) and Shri Baldevji Temple (1795 AD). There is a temple of Goddess Padmavati in Panna, which is still situated near the mythical Kil-Quila river in the north-west. Local legend has it that in ancient times the settlement of Panna was on the other side of the river Kil-Kila where Rajgound and Kol people ruled. 2 miles north of Panna, the old palace of Maharaj Chhatrasal still exists in ruins. Panna was also called Parna in the eighteenth-nineteenth centuries. This name is mentioned in the then state papers.

Tourist spot

Siddhanth Temple Patna Tamoli District Panna Madhya Pradesh

One of the divine places that witnessed the exile of Lord Shri Ram is Siddhanath, this was the meeting of Lord Shri Ram with August Rishi. Evidence of this is also found in Ramayana. Along with this, during the search of Ram Van Path Gaman Marg, it was also confirmed by the team of Archeology Department. This place is 60 km away from Panna district headquarter in Patna Tamoli area, which is known as Siddhanath temple. This is where the ashram of August Rishi still exists. Here he used to do penance.

August Muni had come to the Siddhanath area located near Tamoli village of Patna in Panna district and did penance here. Sant Vel Kudi says that its description is also found in Valmiki Ramayana. Tamil language is equivalent to Sanskrit and it was also published by August Muni. Bodhigai mountain is in the south and there also August ji did penance. After this he went on a trip to India and he united the whole of India in one thread. The description of August Muni is also found in the famous book Adinwar of South India and we are blessed to have darshan here.

The temple of Siddhanath was built in the 6th century. Along with this temple of unique craftsmanship, there used to be a 108 Kundiya grand temple here, the evidence of which can be seen clearly.

पन्ना हीरे की खानों के लिए प्रसिद्ध है। हीरे के भंडार का एक बड़ा समूह विंध्य रेंज की एक शाखा पर उत्तर-पूर्व में 240 किमी या उससे अधिक तक फैला हुआ है, और इसे पन्ना समूह के रूप में जाना जाता है। पन्ना में हीरे की खदानों का प्रबंधन भारत सरकार के राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी लिमिटेड) की हीरा खनन परियोजना के तहत किया जाता है।

पन्ना (Panna) भारत के मध्य प्रदेश राज्य के पन्ना ज़िले में स्थित एक ऐतिहासिक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है। पन्ना यहां मिलने वाले हीरों के लिए जाना जाता है

पन्ना एक पौराणेतहासिक नगर है इसका उल्लेख विष्णु पुराण और पद्मपुराण में किलकिल प्रदेश से आता है वाकटाक वंश की उत्पत्ति स्थल है। नागवंश की कुलदेवी पद्मावती किलकिला नदी के तीरे विराजित हैं इसके कारण इसका नाम पद्मा और बाद में परना झिरना और पन्ना हुआ। 1675 में बुंदेलखंड के शासक छत्रसाल द्वारा उनके आध्यात्मिक गुरु स्वामी प्राणनाथ के आदेश पर राजधानी बनाए जाने के कारण इस शहर का महत्त्व बढ़ गया। यहाँ स्थित ऐतिहासिक महत्त्व के भवनों में संगमरमर के गुंबद वाला स्वामी प्राणनाथ मंदिर (1795) और श्री बलदेवजी मंदिर शामिल हैं। और बुंदेलखण्ड के प्रसिद्ध श्री युगलकिशोर मंदिर में देश की भगवान श्रीकृष्ण का अष्टसिद्ध शालिगराम विग्रह है। पन्ना स्थित बलदेव मंदिर लंदन पैलेस श्रेणी पर आधारित है। पन्ना प्राणनाथ मंदिर प्रणामी संप्रदाय के लोगो का प्रमुख केंद्र है। महाभारत कालीन विराट नगर की पहचान यहां के बरहटा से की जाती है। 1921 में यहाँ नगरपालिका गठन हुआ था। इसके आसपास के क्षेत्र मुख्यत: भूतपूर्व पन्ना और अजयगढ़ रियासतों के हिस्से हैं। इसमें पन्ना श्रृंखला नामक पर्वतीय क्षेत्र भी शामिल है, जो विंध्य श्रृंखला की शाखा है। त्रेता युग मे भगवान श्रीराम चित्रकुुुट होते हुये पंंन्ना से पवई तेहशील आस पास प्रसिद्ध स्थल बृजपूर के निकट बृहस्पति कुंड , सारंगपूर के निकट सुुतीक्ष्ंण ऋषि का आश्रम, बडगांव के निकट ऋषि अग्निजिह का आश्रम सलेहा के निकट अगस्तमुनि का आश्रम, सिद्धनाथ आश्रम कुछ समय बिताया। चंद्रगुप्त के गुरु चाणक्य के जन्मस्थली सलेहा से 4 कि॰मी॰ दूर प्रसिद्ध चौमुखनाथ शिवमन्दिर है। पवई तेहशील के निकट स्थित कलेही माता का मन्दिर , हनुभाटे चान्दे के प्रसिद्ध पहाड़िया, तेंदूघाट प्रसिद्ध स्थल है जो मनोहर स्थल हैं।

इतिहास

पन्ना एक ऐतिहासिक नगर यह नगर भारत के राज्य मध्य प्रदेश के उत्तरी भाग में स्थित है। बुंदेलखंड की रियासत के रूप में इस नगर को बुंदेला नरेश छत्रसाल ने औरंगजेब की मृत्यु (1707 ई.) के पश्चात् अपने राज्य की राजधानी बनाया। मुग़ल सम्राट बहादुरशाह ने 1708 ई.में छत्रसाल की सत्ता को मान लिया। पन्ना में स्थित ऐतिहासिक महत्त्व के भवनों में संगमरमर के गुंबद वाला स्वामी प्राणनाथ मंदिर (1756 ई.) और श्री बलदेवजी मंदिर (1795 ई.)शामिल हैं। पन्ना में पद्मावती देवी का एक मंदिर है, जो उत्तर-पश्चिम में स्थित पौराणिक किल-किला नदी के पास आज भी स्थित है। स्थानीय जनश्रुति है कि प्राचीन काल में पन्ना की बस्ती किल-किला नदी के उस पार थी जहाँ राजगौंड और कोल लोगों का राज्य था। पन्ना से 2 मील उत्तर की ओर महाराज छत्रसाल का पुराना महल आज भी खण्डहर रूप में विद्यमान है। पन्ना को अठारहवीं-उन्नीसवीं सदी में पर्णा भी कहते थे। यह नाम तत्कालीन राज्यपत्रों में उल्लिखित है।

पर्यटन स्थल

सिद्धनाथ मंदिर पटना तमोली जिला पन्ना मध्यप्रदेश

भगवान श्रीराम के वनवास का साक्षी रहे दिव्य स्थानों में से एक सिद्धनाथ है अगस्त ऋषि से भगवान श्रीराम की भेंट यही हुई थी। इसका प्रमाण रामायण में भी मिलता है। साथ ही राम वन पथ गमन मार्ग की खोज के दौरान पुरातत्व विभाग की टीम ने भी इसकी पुष्टि की थी। यह स्थान पन्ना जिला मुख्यालय से 60 किमी दूर पटना तमोली क्षेत्र में है, जिसे सिद्धनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहीं अगस्त ऋषि का आश्रम आज भी मौजूद है। यहां वे तपस्या किया करते थे।

अगस्त मुनि पन्ना जिले के पटना तमोली ग्राम के पास स्थित सिद्धनाथ क्षेत्र में आए थे और यहां उन्होंने तपस्या की थी। संत वेल कुडी का कहना है कि बाल्मीकी रामायण में भी इसका वर्णन मिलता है। तमिल भाषा संस्कृत के समकक्ष है और इसका प्रकाशन भी अगस्त मुनि ने किया था। बोधिगयी पहाड़ दक्षिण में है और वहां भी अगस्त जी ने तपस्या की थी। इसके बाद वे भारत की यात्रा पर निकले और उन्होंने पूरे भारत को एक सूत्र में पिरोया। दक्षिण भारत के प्रसिद्ध ग्रंथ आडिंवार में भी अगस्त मुनि का वर्णन मिलता है और यहां दर्शन कर हम लोग धन्य होते हैं।

सिद्धनाथ का मंदिर 6 वीं शताब्दी में बनाया गया था। अनोखी शिल्प कला के इस मंदिर के साथ कभी यहां 108 कुंडीय भव्य मंदिर भी हुआ करता था जिसके प्रमाण साफ देखे जा सकते हैं।

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