Geography | GK | GK MCQ

The ‘Chipko Movement’ is related to / ‘चिपको आंदोलन’ किससे संबंधित है?

The ‘Chipko Movement’ is related to / ‘चिपको आंदोलन’ किससे संबंधित है?

 

(1) Wildlife preservation / वन्यजीव संरक्षण
(2) Forest conservation / वन्यजीव संरक्षण
(3) Scientific agriculture / वैज्ञानिक कृषि
(4) Deforestation / वनों की कटाई

(SSC Section Officer (Audit) Exam. 06.01.2008)

Answer / उत्तर : – 

(2) Forest conservation / वन्यजीव संरक्षण

Explanation / व्याख्यात्मक विवरण :-

 

The Chipko movement or Chipko Andolan is a movement that practised the Gandhian methods of satyagraha and non-violent resistance, through the act of hugging trees to protect them from being felled. The modern Chipko movement started in the early 1970s in the Garhwal Himalayas of Uttarakhand, then in Uttar Pradesh with growing awareness towards rapid deforestation. The Chipko movement though primarily a livelihood movement rather than a forest conservation movement went on to become a rallying point for many future environmentalists, environmental protests and movements the world over and created a precedent for non-violent protest.

The Chipko movement was an environmental-protection movement. This was done by farmers in the Indian state of Uttarakhand (then part of Uttar Pradesh) to protest the felling of trees. They were opposing the deforestation by the contractors of the State Forest Department and asserting their traditional rights over them.

This movement started in the year 1973 in Chamoli district of the then Uttar Pradesh. Within a decade, it had spread to the entire Uttarakhand region. One of the main points of the Chipko movement was that women participated in large numbers in it. This movement was started in 1970 under the leadership of India’s famous environmentalist Sunderlal Bahuguna, Com. Govind Singh Rawat, Chandiprasad Bhatt and Smt. Gauradevi.

It is also said that Com. Govind Singh Rawat was the practical side of the Chipko movement, when Chipko himself was hit in the form of extensive restrictions on the valley of the birthplace of Chipko, then Com. Govind Singh Rawat gave the direction to the snatch movement. The Chipko movement was a movement to stop the impractical felling of forests and to protect the forest rights of the people dependent on the forests. 27 women of Reni village had failed by betting on their lives.

चिपको आंदोलन या चिपको आंदोलन एक ऐसा आंदोलन है जो सत्याग्रह और अहिंसक प्रतिरोध के गांधीवादी तरीकों का अभ्यास करता है, पेड़ों को गिरने से बचाने के लिए उन्हें गले लगाने के कार्य के माध्यम से। आधुनिक चिपको आंदोलन 1970 के दशक की शुरुआत में उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में शुरू हुआ, फिर उत्तर प्रदेश में तेजी से वनों की कटाई के प्रति बढ़ती जागरूकता के साथ। चिपको आंदोलन हालांकि मुख्य रूप से एक वन संरक्षण आंदोलन के बजाय एक आजीविका आंदोलन था, जो दुनिया भर में कई भविष्य के पर्यावरणविदों, पर्यावरण विरोधों और आंदोलनों के लिए एक रैली स्थल बन गया और अहिंसक विरोध के लिए एक मिसाल कायम की।

चिपको आन्दोलन एक पर्यावरण-रक्षा का आन्दोलन था। यह भारत के उत्तराखण्ड राज्य (तब उत्तर प्रदेश का भाग) में किसानो ने वृक्षों की कटाई का विरोध करने के लिए किया था। वे राज्य के वन विभाग के ठेकेदारों द्वारा वनों की कटाई का विरोध कर रहे थे और उन पर अपना परम्परागत अधिकार जता रहे थे।

यह आन्दोलन तत्कालीन उत्तर प्रदेश के चमोली जिले में सन 1973 में प्रारम्भ हुआ। एक दशक के अन्दर यह पूरे उत्तराखण्ड क्षेत्र में फैल गया था। चिपको आन्दोलन की एक मुख्य बात थी कि इसमें स्त्रियों ने भारी संख्या में भाग लिया था। इस आन्दोलन की शुरुवात 1970 में भारत के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सुन्दरलाल बहुगुणा, कामरेड गोविन्द सिंह रावत, चण्डीप्रसाद भट्ट तथा श्रीमती गौरादेवी के नेत्रत्व मे हुई थी।

यह भी कहा जाता है कि कामरेड गोविन्द सिंह रावत ही चिपको आन्दोलन के व्यावहारिक पक्ष थे, जब चिपको की मार व्यापक प्रतिबंधों के रूप में स्वयं चिपको की जन्मस्थली की घाटी पर पड़ी तब कामरेड गोविन्द सिंह रावत ने झपटो-छीनो आन्दोलन को दिशा प्रदान की। चिपको आंदोलन वनों का अव्यावहारिक कटान रोकने और वनों पर आश्रित लोगों के वनाधिकारों की रक्षा का आंदोलन था रेणी में 2400 से अधिक पेड़ों को काटा जाना था, इसलिए इस पर वन विभाग और ठेकेदार जान लडाने को तैयार बैठे थे जिसे गौरा देवी जी के नेतृत्व में रेणी गांव की 27 महिलाओं ने प्राणों की बाजी लगाकर असफल कर दिया था।

Similar Posts

Leave a Reply