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The largest irrigation canal in India is called the : / भारत की सबसे बड़ी सिंचाई नहर कहलाती है :

The largest irrigation canal in India is called the : / भारत की सबसे बड़ी सिंचाई नहर कहलाती है :


(1) Yamuna canal / यमुना नहर
(2) Sirhand canal / सरहंद नहर
(3) Indira Gandhi canal / इंदिरा गांधी नहर
(4) Upper Bari Doab canal / अपर बारी दोआब नहर

(SSC Combined Graduate Level Prelim Exam. 27.02.2000)

Answer / उत्तर : – 

(3) Indira Gandhi canal / इंदिरा गांधी नहर

Explanation / व्याख्यात्मक विवरण :- 


The Indira Gandhi Canal is the largest canal project in India. It starts from the Harike Barrage at Sultanpur, a few kilometers below the confluence of the Sutlej and Beas rivers in Punjab state. it provides irrigation facilities to the north-western region of Rajasthan, a part of the Thar Desert. It consists of the Rajasthan feeder canal (with the first 167 km in Punjab and Haryana and the remaining 37 km in Rajasthan) and 445 km of the Rajasthan main canal which is entirely within Rajasthan. This canal enters into Haryana from Punjab near Lohgarh village of Haryana, then running in western part of district Sirsa it enters into Rajasthan near Kharakhera village.

‘Indira Gandhi Canal’ is an important irrigation project of India. This is the longest canal not only in India but in the world, which has brought ‘Green Revolution’ in Rajasthan.

important point

Country- India
Source- Harike Dam, Punjab
Length – 649 kms
Water immersion – 18,500 cu ft/sec
Launched – March 31, 1958
Inaugurated – Govind Vallabh Pant

This huge canal was first conceived in 1948 by the then Secretary and Chief Engineer of Bikaner State, Late Shri Kanwarsen and he planned it. At the top of this canal affected by Harike barrage, the width of its bottom and top surface is 134 feet and 218 feet respectively and the depth of the water is 21 feet.

world’s largest canal

The world’s largest 649 km long canal gave birth to the Green Revolution in Rajasthan’s desert region, the industrial revolution that developed and the social revolution that awakened public consciousness, the credit goes to Indira Gandhi Canal. . This is the same huge canal, which is known as Maru Ganga and due to which the environment has improved so much that the geography of that area of ​​the sand dune region has changed. Changing geography is shaping a new history of western Rajasthan. The long water journey of this canal is Jai Yatra in the true sense.

Significance of Indira Gandhi Canal for Rajasthan

In the midst of inaccessible and harsh desert, extraordinary and unbearable temperature and adverse and terrible geographical conditions, transporting the snow-water of the Himalayas by building a canal in this waterless and uninhabited area was in reality a courageous step against nature. But Rajasthan accepted this challenge and conquered nature with hard work.

Due to this a new tweet has come in the sand dunes. Thousands of workers and engineers with their labor courage, dedication and skill made the dream come true three decades ago. Due to the lack of rainfall and lack of water sources in the sand dune area, where people used to crave water, the place has changed and the sand dunes have developed into green fields.

In the condition of the horrors of the desert, the way this Indira Gandhi Canal descended as a canal-like river, its example is not found anywhere else in the world. It is a wonder how the imagination of the canal from Hari’s barrage in the green belt of Punjab to Gadra Road in Barmer district of Rajasthan is being realized.

The total length of the canal system is 8,836 km. Due to this, the value of the land has increased by five thousand crore rupees. Indira Gandhi Canal is neither the dead Ganges nor Saraswati, it is actually the ‘lifeline’ for the region which has been craving drop by drop for centuries or it is said that it is the ‘Bhagyashree’ of all-round development of Rajasthan.

concept of canal

This huge canal was first conceived in 1948 by the then Secretary and Chief Engineer of Bikaner State, Late Shri Kanwarsen and he planned it. When the ‘Harike Barrage’ situated at the confluence of the Beas and Sutlej rivers in Punjab was ready, on the basis of this plan, the framework prepared by the Central Hydroelectric Commission led to the river ‘Water Distribution Agreement’ in 1955 and 1981.

With this, the Indira Gandhi Canal got a proposal to use 75.9 lakh acre feet of water. The Indira Gandhi Canal Project is also called the “Lifeline of Rajasthan/Maruganga”. Earlier its name was Rajasthan Canal. It was renamed as Indira Gandhi Canal Project on 2 November 1984.

Engineer Kanwar Sain of Bikaner presented a report to the Government of India in 1948, the subject of which was ‘The need of water in Bikaner State’. The headquarter of Indira Gandhi Canal Project is in Jaipur. The main objective of the construction of this canal is to utilize 86 lakh acres of cubic feet of water allocated to Rajasthan from the waters of Ravi, Beas rivers.

The Indira Gandhi Canal Project has two parts.

First part – Rajasthan is called feeder. Its length is 204 km. (169 KM Punjab & Haryana + 35 KM Rajasthan) which extends from Harikai Barrage to Masitawali Head of Hanumangarh. Water is not exploited in this part of the canal.

The second part is the main canal. Its length is 445 km. Is. It extends from Masitawali to Mohangarh town of Jaisalmer. Thus its total length is 649 km. Is. The length of its distributaries is 9060 km. Is.

Rajasthan feeder Suratgarh, Anupgarh, Pugal branch has been constructed in the first phase of the project. Along with this, 3075 kms. Long distribution canals have been constructed.

इंदिरा गांधी नहर भारत की सबसे बड़ी नहर परियोजना है। यह पंजाब राज्य में सतलुज और ब्यास नदियों के संगम से कुछ किलोमीटर नीचे सुल्तानपुर में हरिके बैराज से शुरू होता है। यह राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र, थार मरुस्थल के एक भाग में सिंचाई की सुविधा प्रदान करता है। इसमें राजस्थान फीडर नहर (पंजाब और हरियाणा में पहली 167 किमी और राजस्थान में शेष 37 किमी के साथ) और 445 किमी राजस्थान मुख्य नहर है जो पूरी तरह से राजस्थान के भीतर है। यह नहर हरियाणा के लोहगढ़ गांव के पास पंजाब से हरियाणा में प्रवेश करती है, फिर सिरसा जिले के पश्चिमी भाग में चलकर खारखेड़ा गांव के पास राजस्थान में प्रवेश करती है।

‘इन्दिरा गांधी नहर’ भारत की महत्त्वपूर्ण सिंचाई परियोजना ( Irrigation project) है। यह भारत ही नहीं अपितु विश्व की सबसे लम्बी नहर है, जिसने राजस्थान में ‘हरित क्रांति’ ( Green revolution) ला दी है।

महत्वपूर्ण बिंदु

देश- भारत
स्रोत- हरिके बाँध, पंजाब
लम्बाई – 649 किलोमीटर
जल विसर्जन- 18,500 घनफुट/सेकंड
लोकार्पण- 31 मार्च, 1958
उद्घाटनकर्ता- गोविन्द वल्लभ पंत

इस विशाल नहर की कल्पना सबसे पहले 1948 में तत्कालीन बीकानेर राज्य के सचिव एवं मुख्य अभियन्ता स्वर्गीय श्री कंवरसेन द्वारा की गई और उन्होंने इसकी योजना बनाई। हरिके बैराज से प्रभावित इस नहर के शीर्ष स्थल पर इसके तल व ऊपरी सतह की चौड़ाई क्रमशः 134 फुट व 218 फुट है और पानी की गहराई 21 फुट है।

विश्व की सबसे बड़ी नहर

विश्व की सबसे बड़ी 649 किलोमीटर लम्बी नहर ने राजस्थान के मरु प्रदेश में जिस हरित क्रांति को जन्म दिया, जिस औद्योगिक क्रांति ( industrial Revolution) से विकास किया और जिस समाजिक क्रांति से जन-चेतना को जाग्रत किया, उसका श्रेय इन्दिरा गाँधी नहर को है। यह वही विशाल नहर है, जो मरु गंगा के नाम से विख्यात है और जिसके कारण पर्यावरण में ऐसा सुधार हुआ है कि बालू के टीलों वाले प्रदेश के उस क्षेत्र का भूगोल ही बदल गया है। भूगोल बदलने से पश्चिमी राजस्थान के नए इतिहास की संरचना हो रही है। इस नहर की लम्बी जल-यात्रा सही अर्थों में जय यात्रा है।

राजस्थान के लिए इन्दिरा गांधी नहर का महत्त्व

दुर्गम व कठोर मरुस्थल, असाधारण व असहनीय तापक्रम और विपरीत व भयानक भौगोलिक परिस्थितियों के बीच इस जल विहीन और निर्जन क्षेत्र में नहर का निर्माण कर हिमालय का हिम-जल पहुँचाना यथार्थ में प्रकृति के विरुद्ध एक साहसी कदम था। लेकिन राजस्थान ने इस चुनौती को स्वीकारा और कड़े परिश्रम से प्रकृति पर विजय प्राप्त की।

इससे बालू के टीलों में नया कलरव आया है। हजारों श्रमिकों और इंजीनियरों ने अपने श्रम साहस लगन और कौशल से तीन दशक पूर्व सोचे गए सपने को साकार किया। रेत के टीलों से भरे क्षेत्र में वर्षा का अभाव और जल स्रोतों की कमी के कारण जहाँ लोग पानी-पानी को तरसते थे, वहाँ की अब काया पलट हो गई है और रेत के टीले हरे भरे खेतों में विकसित हो गए हैं।

मरुस्थल की भयावहता की स्थिति में जिस प्रकार यह इन्दिरा गाँधी नहर एक नहर रूपी नदी के रूप में अवतरित हुई, उसका उदाहरण विश्व में अन्यत्र नहीं मिलता। पंजाब के हरे भरे क्षेत्र हरि के बैराज से राजस्थान के सीमान्त क्षेत्र बाड़मेर ज़िले में गडरा रोड तक की नहर की कल्पना कैसे साकार हो रही है, यह आश्चर्य है।

नहर प्रणाली की कुल लम्बाई 8,836 किलोमीटर है। इससे भूमि के मूल्य में पाँच हजार करोड़ रुपये की वृद्धि हो गई है। इन्दिरा गाँधी नहर न मरु गंगा है और न सरस्वती, यह तो वास्तव में बूँद-बूँद को सदियों से तरसते क्षेत्र के लिये ‘जीवन रेखा’ है या कहिए कि राजस्थान के चहुँमुखी विकास की ‘भाग्यश्री’ है।

नहर की कल्पना

इस विशाल नहर की कल्पना सबसे पहले 1948 में तत्कालीन बीकानेर राज्य के सचिव एवं मुख्य अभियन्ता स्वर्गीय श्री कंवरसेन द्वारा की गई और उन्होंने इसकी योजना बनाई। पंजाब में व्यास और सतलुज नदी के संगम पर स्थित जब ‘हरिके बैराज’ तैयार हो गया तो इस योजना के आधार पर केन्द्रीय जल विद्युत आयोग (Water Commission) द्वारा जो रूपरेखा बनी, उससे 1955 और 1981 में नदी ‘जल वितरण समझौता’ हुआ।

इसी से इन्दिरा गांधी नहर को 75.9 लाख एकड़ फुट पानी के उपयोग का प्रस्ताव मिला। इन्दिरा गांधी नहर परियोजना को “राजस्थान की जीवन रेखा/मरूगंगा” भी कहा जाता है। पहले इसका नाम राजस्थान नहर था। 2 नवम्बर 1984 को इसका नाम इन्दिरा गांधी नहर परियोजना कर दिया गया है।

बीकानेर के इंजीनियर कंवर सैन ने 1948 में भारत सरकार के समक्ष एक प्रतिवेदन पेश किया, जिसका विषय ‘बीकानेर राज्य में पानी की आवश्यकता’ था। इन्दिरा गांधी नहर परियोजना का मुख्यालय Jaipur में है। इस नहर के निर्माण का मुख्य उद्द्देश्य रावी, व्यास नदियों के जल से राजस्थान को आवंटित 86 लाख एकड़ घन फीट जल को उपयोग में लेना है।

इन्दिरा गांधी नहर परियोजना के दो भाग हैं।

प्रथम भाग – राजस्थान फीडर कहलाता है। इसकी लम्बाई 204 कि.मी. (169 कि.मी. पंजाब व हरियाणा + 35 कि.मी. राजस्थान) है, जो हरिकै बैराज से हनुमानगढ़ के मसीतावाली हैड तक विस्तारित है। नहर के इस भाग में जल का दोहन नहीं होता है।

दूसरा भाग – मुख्य नहर है। इसकी लम्बाई 445 किमी. है। यह मसीतावाली से जैसलमेर के मोहनगढ़ कस्बे तक विस्तारित है। इस प्रकार इसकी कुल लम्बाई 649 कि.मी. है। इसकी वितरिकाओं की लम्बाई 9060 कि.मी. है।

परियोजना के निर्माण के प्रथम चरण में राजस्थान फीडर सूरतगढ़, अनुपगढ़, पुगल शाखा का निर्माण हुआ है। इसके साथ-साथ 3075 कि.मी. लम्बी वितरक नहरों का निर्माण हुआ है।

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