| |

The ‘sorrow of Bihar’ is / ‘बिहार का दुख’ है

The ‘sorrow of Bihar’ is / ‘बिहार का दुख’ है

 

(1) Damodar  / दामोदर
(2) Kosi / कोसी
(3) Son / सोन
(4) Gandak / गंडकी

(SSC Combined Matric Level (PRE) Exam. 30.03.2008)

Answer / उत्तर : – 

(2) Kosi / कोसी

Explanation / व्याख्यात्मक विवरण :-

Kosi is known as the “sorrow of Bihar”, as it has caused widespread human suffering in the past due to flooding and very frequent changes in course, when it flows from Nepal to Bihar. Over the last 250 years, the Kosi River has shifted its course over 120 km from east to west. Its unstable nature has been attributed to the heavy silt it carries during the monsoon season and flooding in India has extreme effects.

The Kosi River or Koshi River originates from the Himalayas in Nepal and enters India Prajwal via Bhimanagar in Bihar.The curse (Bihar’s grief) is called.

If we look at its geographical nature, it will be known that it has expanded 120 km in the last 250 years. Bringing various types of sediments (sand, pebbles) from the high hills of the Himalayas, this river is continuously spreading its area. This river flowing through the plains of northern Bihar makes the entire region fertile. Both Nepal and India have built dams on this river; However, some environmentalists had expressed the possibility of harm from this.

कोसी को “बिहार का शोक” के रूप में जाना जाता है, क्योंकि इसने अतीत में बाढ़ के कारण व्यापक मानव पीड़ा और नेपाल से बिहार में प्रवाहित होने पर बहुत बार-बार होने वाले परिवर्तनों का कारण बना है। पिछले 250 वर्षों में, कोसी नदी ने अपना मार्ग पूर्व से पश्चिम की ओर 120 किमी से अधिक स्थानांतरित कर लिया है। इसकी अस्थिर प्रकृति को मानसून के मौसम के दौरान भारी गाद के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है और भारत में बाढ़ का अत्यधिक प्रभाव पड़ता है।

कोसी नदी या कोशी नदी नेपाल में हिमालय से निकलती है और बिहार में भीम नगर के रास्ते से भारत प्रज्वल में दाखिल होती है। इसमें आने वाली बाढ से बिहार में बहुत तबाही होती है जिससे इस नदी को ‘बिहार का अभिशाप(बिहार क शोक)’कहा जाता है।

इसके भौगोलिक स्वरूप को देखें तो पता चलेगा कि पिछले 250 वर्षों में 120 किमी का विस्तार कर चुकी है। हिमालय की ऊँची पहाड़ियों से तरह तरह से अवसाद (बालू, कंकड़-पत्थर) अपने साथ लाती हुई ये नदी निरंतर अपने क्षेत्र फैलाती जा रही है। उत्तरी बिहार के मैदानी इलाकों को तरती ये नदी पूरा क्षेत्र उपजाऊ बनाती है। नेपाल और भारत दोनों ही देश इस नदी पर बाँध बना चुके हैं; हालाँकि कुछ पर्यावरणविदों ने इससे नुकसान की भी संभावना जतायी थी।

Similar Posts

Leave a Reply