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What is the full form of FDI, which is currently in news ? / FDI का पूर्ण रूप क्या है, जो वर्तमान में चर्चा में है?

What is the full form of FDI, which is currently in news ? / FDI का पूर्ण रूप क्या है, जो वर्तमान में चर्चा में है?

 

(1) Floating Deposit Investment / अस्थायी जमा निवेश
(2) Foreign Direct Investment / प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
(3) Foreign Diverse Investment / विदेशी विविध निवेश
(4) Financial Derivatives in India / भारत में वित्तीय संजात

(SSC Multi-Tasking Staff Exam. 24.03.2013)

Answer / उत्तर :-

(2) Foreign Direct Investment / प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

Explanation / व्याख्या :-

FDI Equity:

There has been an increase of 112% in FDI equity inflows in FY 2020-21 as compared to April-July period of the previous year (US$ 9.61 billion).
top area:
The ‘automobile industry’ has emerged as the top sector. Its total contribution to FDI equity inflows is 23%, followed by computer software and hardware (18%) and services (10%).

Top FDI Recipient States:

Karnataka has been the top recipient state with a share of 45 per cent of the total FDI equity inflows, followed by Maharashtra (23%) and Delhi (12%).

foreign direct investment

Definition:
FDI is a process whereby residents of one country (origin country) acquire ownership of assets for the purpose of controlling the production, distribution and other activities of a firm in another country (host country).
This is different from foreign portfolio investment (FPI), in which the foreign entity buys only one company’s stocks and bonds, but does not give the FPI investor the right to control the business.

three components:

Equity Capital: It deals with the purchase of shares of an enterprise by a foreign direct investor in a country other than its own.
Reinvested Income: It includes that part of earnings of direct investors which is not distributed by the affiliates of a company in the form of dividend or this earnings are not received by the direct investor. Such profit is reinvested by the associates.
Intra-company debt: This involves short-term or long-term lending and lending of funds between direct investors (or enterprises) and affiliated enterprises.

FDI route in India

Automatic route: In this the foreign entity does not require prior approval of the government or the Reserve Bank of India.
Government route: In this, the foreign entity needs to take the approval of the government.
The Foreign Investment Facilitation Portal (FIFP) provides the facility of ‘Single Window Clearance’ to the applicants through the approval route. It is administered by the Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT), Ministry of Commerce and Industry.

Government efforts to promote FDI:

Factors such as favorable demographics, powerful mobile and internet access, mass consumption and use of technology have played an important role in attracting investments.
Launch of schemes to attract investment like- National Technical Textiles Mission, Production Based Incentive Scheme, Pradhan Mantri Kisan Sampada Yojana etc.
The government has explained in detail about the initiative under self-reliant India to encourage investment in various sectors.

India has relaxed FDI norms in several sectors over the years as a part of the Make in India initiative to boost domestic manufacturing.

FDI इक्विटी:

पिछले वर्ष की अप्रैल-जुलाई अवधि (9.61 बिलियन अमेरिकी डॉलर) की तुलना में वित्त वर्ष 2020-21 में FDI इक्विटी प्रवाह में 112% की वृद्धि हुई है।
शीर्ष क्षेत्र:
‘ऑटोमोबाइल उद्योग’ शीर्ष क्षेत्र के रूप में उभरा है। FDI इक्विटी प्रवाह में इसका कुल योगदान 23% रहा है, इसके बाद कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर (18%) तथा सेवा क्षेत्र (10%) का स्थान रहा है।

शीर्ष FDI प्राप्तकर्त्ता राज्य:

कुल FDI इक्विटी प्रवाह में 45 प्रतिशत हिस्से के साथ कर्नाटक शीर्ष प्राप्तकर्त्ता राज्य रहा है, इसके बाद महाराष्ट्र (23%) और दिल्ली (12%) का स्थान है।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

परिभाषा:
FDI एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत एक देश (मूल देश) के निवासी किसी अन्य देश (मेज़बान देश) में एक फर्म के उत्पादन, वितरण और अन्य गतिविधियों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से संपत्ति का स्वामित्व प्राप्त करते हैं।
यह विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) से भिन्न है, जिसमें विदेशी इकाई केवल एक कंपनी के स्टॉक और बॉण्ड खरीदती है किंतु इससे FPI निवेशक को व्यवसाय पर नियंत्रण का अधिकार प्राप्त नहीं होता है।

तीन घटक:

इक्विटी कैपिटल: यह विदेशी प्रत्यक्ष निवेशक की अपने देश के अलावा किसी अन्य देश के उद्यम के शेयरों की खरीद से संबंधित है।
पुनर्निवेशित आय: इसमें प्रत्यक्ष निवेशकों की कमाई का वह हिस्सा शामिल होता है जिसे किसी कंपनी के सहयोगियों (Affiliates) द्वारा लाभांश के रूप में वितरित नहीं किया जाता है या यह कमाई प्रत्यक्ष निवेशक को प्राप्त नहीं होती है। सहयोगियों द्वारा इस तरह के लाभ को पुनर्निवेश किया जाता है।
इंट्रा-कंपनी ऋण: इसमें प्रत्यक्ष निवेशकों (या उद्यमों) और संबद्ध उद्यमों के बीच अल्पकालिक या दीर्घकालिक उधार और निधियों का उधार शामिल होता है।

भारत में FDI संबंधी मार्ग

स्वचालित मार्ग: इसमें विदेशी इकाई को सरकार या भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होती है।
सरकारी मार्ग: इसमें विदेशी इकाई को सरकार की स्वीकृति लेनी आवश्यक होती है।
विदेशी निवेश सुविधा पोर्टल (Foreign Investment Facilitation Portal- FIFP) अनुमोदन मार्ग के माध्यम से आवेदकों को ‘सिंगल विंडो क्लीयरेंस’ की सुविधा प्रदान करता है। यह उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रशासित है।

FDI को बढ़ावा देने के लिये सरकारी प्रयास:

अनुकूल जनसांख्यिकी, प्रभावशाली मोबाइल और इंटरनेट की पहुँच, बड़े पैमाने पर खपत एवं प्रौद्योगिकी के उपयोग जैसे कारकों ने निवेश को आकर्षित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
निवेश को आकर्षित करने वाली योजनाओं का शुभारंभ जैसे- राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना, प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना आदि।
सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिये आत्मनिर्भर भारत के तहत पहल के संबंध में विस्तार से बताया है।

घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिये मेक इन इंडिया पहल के एक हिस्से के रूप में भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई क्षेत्रों में एफडीआई के नियमों में ढील दी है।

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