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A crop grown in zaid season is / जायद के मौसम में उगाई जाने वाली फसल है

A crop grown in zaid season is / जायद के मौसम में उगाई जाने वाली फसल है

 

(1) Watermelon / तरबूज
(2) Soyabean / सोयाबीन
(3) Maize / मक्का
(4) Jute / जूट

(SSC (10+2) Level Data Entry Operator & LCD Exam. 11.12.2011)

Answer / उत्तर : –

(1) Watermelon / तरबूज

Zaid Crops

Explanation / व्याख्यात्मक विवरण :-

In Indian sub-continent, the crops grown on irrigated lands which do not have to wait for monsoons, in the short duration between Rabi and Kharif crop season, mainly from March to June, are called Zaid crops. Examples: water melon, musk melon, gourds and cucumber.

Three seasons of cultivation are considered very important for the farmers, Rabi, Kharif and Zayed. Farmers sow crops in their fields every year according to the season. Let us tell you that the crops sown in the middle of Rabi and Kharif are called Zaid crops.

That is, the crop grown in the middle of the two main crops of the year or before any main crop in a short time is called zayed or intercrop. Proper and timely use of available resources is very important for increasing agricultural production in Zayed farming. Let the farmer brothers know that at the time of cultivation of Zaid crops, two main things have to be taken care of. The first thing is to arrange proper irrigation facility and secondly, the field should be vacant at the appropriate time for sowing the Zaid crop. Let us now give you general and important information related to Zaid crop.

Zayed season crops

Vegetables like Tinda, Watermelon, Melon, Cucumber, Cucumber, Gourd, Pumpkin, Okra, Tomato, Arbi, etc., are mainly cultivated in this season. Apart from this, sowing of moong, urd, groundnut, gram, green fodder, cotton and jute is done.

When to sow Zaid crops

Now is the appropriate time for sowing of Zayed season crops. These crops can be sown from March. The farmers who had cultivated carrots, cauliflower, cabbage and potatoes in their fields, now the fields of these crops are empty. Farmers can sow Zayed season crops in these vacant fields.
Method of sowing Zaid crops

Sowing of crops of this season should always be done in rows. Farmers should not plant the plants of any vine-bearing crop like gourd, turai and tinda crop in different places in the same bed. If you are planting gourd vine, then do not plant any other vine like bitter gourd, pumpkin etc. in between them. Let us tell you that many times the fruits of the vine begin to wilt and fall at a young stage, so 40 to 45 cm wide and 30 cm deep long groove should be made for sowing vine vegetables. Along with this, the distance from plant to plant should be kept about 60 cm.

Planting should be done between vegetables or on both sides of the drain. Apart from this, for the spread of the vine, about 2 meters wide beds should be made from the sides of the drain. If the space is less, then fencing of iron wires parallel to the length of the drain and spread the vine on it. If farmers cultivate Zaid crops in this way, then they get good yield of crops.

भारतीय उपमहाद्वीप में, सिंचित भूमि पर उगाई जाने वाली फसलें जिन्हें मानसून की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती है, रबी और खरीफ फसल के मौसम के बीच की छोटी अवधि में, मुख्य रूप से मार्च से जून तक, जैद फसलें कहलाती हैं। उदाहरण: तरबूज, कस्तूरी तरबूज, लौकी और खीरा।

किसानों के लिए खेती के तीन सीजन बहुत अहम माने जाते हैं, रबी, खरीफ और जायद. किसान हर साल सीजन के अनुसार ही अपने खेतों में फसलों की बुवाई करते हैं. बता दें कि रबी और खरीफ के मध्य में बोई जाने वाली फसलों को जायद की फसल कहा जाता है.

यानी साल की दो मुख्य फसलों के बीच में या फिर किसी मुख्य फसल के पहले कम समय में उगाई जाने वाली फसल को जायद या अंतवर्ती फसल कहा जाता है. जायद खेती में कृषि उत्पादन वृद्धि के लिए उपलब्ध संसाधनों का समुचित व सामयिक उपयोग करना बहुत ज़रूरी होता है. किसान भाईयों को बता दें कि जायद फसलों की खेती के समय मुख्य दो बातों को खास ध्यान रखना होता है. पहली बात समुचित सिंचाई सुविधा का प्रबंध करना और दूसरी बात जायद फसल बोने के उपयुक्त समय पर खेत का खाली होना. आइए अब आपको जायद फसल से जुड़ी सामान्य और अहम जानकारी देते हैं.

जायद सीजन की फसलें

इस सीजन में प्रमुख रूप से टिंडा, तरबूज, खरबूज, खीरा, ककड़ी, लौकी, तुरई, भिंडी, टमाटर, अरबी आदि सब्जियों की खेती की जाती है. इसके अलावा मूंग, उर्द, मूंगफली, चना, हरा चारा, कपास व जूट की बुवाई कर जाती है.

कब करें जायद फसलों की बुवाई

अब जायद सीजन की फसलों की बुवाई का उपयुक्त समय चल रहा है. इन फसलों की बुवाई मार्च से कर सकते हैं. जिन किसानों ने अपने खेतों में गाजर, फूलगोभी, पत्तागोभी और आलू की खेती की थी, अब इन फसलों के खेत खाली हो गए हैं. किसान इन खाली खेतों में जायद सीजन की फसलों की बुवाई कर सकते हैं.
जायद फसलों की बुवाई का तरीका

इस सीजन की फसलों की बुवाई हमेशा पंक्तियों में करना चाहिए. किसानों को बेल वाली किसी भी फसल जैसे लौकी, तुरई व टिंडा फसल के पौधे अलग-अलग जगह न लगाकर एक ही क्यारी में लगाना चाहिए. अगर लौकी की बेल लगा रहे हैं, तो इनके बीच में अन्य कोई बेल जैसे:- करेला, तुरई आदि न लगाएं. बता दें कि बेल वाली सब्जियां कई बार फल छोटी अवस्था में ही गल कर झड़ने लगती है, इसलिए बेल वाली सब्जियों की बुवाई के लिए 40 से 45 सेंटीमीटर चौड़ी और 30 सेंटीमीटर गहरी लंबी नाली बनानी चाहिए. इसके साथ ही पौधे से पौधे की दूरी लगभग 60 सेंटीमीटर रखनी चाहिए.

नाली के दोनों किनारों पर सब्जियों के बीच या पौध रोपण करना चाहिए. इसके अलावा बेल के फैल पाए, इसके लिए नाली के किनारों से लगभग 2 मीटर चौड़ी क्यारियां बनानी चाहिए. अगर जगह कम है, तो नाली के सामानांतर लंबाई में ही लोहे के तारों की फैंसिग लगाएं और इस पर बेल का फैलाव कर दें. अगर किसान इस तरह जायद फसलों की खेती करते हैं, तो इससे उन्हें फसलों की अच्छी पैदावार प्राप्त होती है.

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