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Singhbhum is famous for / सिंहभूम के लिए प्रसिद्ध है

Singhbhum is famous for / सिंहभूम के लिए प्रसिद्ध है

 

(a) Coal / कोयला
(b) Iron / आयरन
(c) Copper /  कॉपर
(d) Aluminum / एल्युमिनियम

(SSC Combined Graduate Level Prelim Exam. 11.05.2003)

Answer / उत्तर : –

(b) Iron / आयरन

Explanation / व्याख्यात्मक विवरण :-

Singhbhum was sometime a large district in the present-day Indian state of Bihar. Chaibasa was the district headquarters of the erstwhile Singhbhum district. Singhbhum is known for its iron ore deposits and it provides for the iron ore requirements of the IISCO steel plants located at Hirapur, Kulti and Burnpur.

  • Singhbhum is a district of Jharkhand state, which is famous for iron ore deposits.
  • Singhbhum supplies iron ore requirements of IISCO Steel Plants located at Hirapur, Kulti and Burnpur.
  • The first iron ore mining was started in the year 1904 in Singhbhum of Jharkhand.
  • The iron ore of Singhbhum is considered to be the best quality and longest lasting iron ore.

Jharkhand accounts for 25 per cent of reserves and over 14 per cent of the total iron ore production of the country. Iron ore mining first of all started in the Singhbhum district in 1904 (then a part of Bihar). Iron ore of Singhbhum district is of highest quality and will last for hundreds of years.

Singhbhum is known for its iron ore deposits and it provides for the iron ore requirements of the IISCO steel plants located at Hirapur, Kulti and Burnpur.

सिंहभूम कभी वर्तमान भारतीय राज्य बिहार का एक बड़ा जिला था। चाईबासा तत्कालीन सिंहभूम जिले का जिला मुख्यालय था। सिंहभूम अपने लौह अयस्क भंडार के लिए जाना जाता है और यह हीरापुर, कुल्टी और बर्नपुर में स्थित इस्को इस्पात संयंत्रों की लौह अयस्क आवश्यकताओं को पूरा करता है

●सिंहभूम झारखंड राज्य का जिला है, जो लौह अयस्क भंडारों के लिए प्रसुद्ध है।

●हीरापुर, कुल्टी और बर्नपुर में स्थित आईआईएससीओ स्टील प्लांट की लौह अयस्क जरूरतों की आपूर्ती सिंहभूम करता है।

●वर्ष १९०४ में झारखंड के सिंहभूम में सबसे पहले लौह अयस्क खनन की शुरुआत हुई थी।

●सिंहभूम का लौह अयस्क सबसे उत्तम गुणवत्ता और सबसे लंबे समय तक टिकनेवाला लौह अयस्क माना जाता है।

झारखंड में देश के कुल लौह अयस्क उत्पादन का 25 प्रतिशत और 14 प्रतिशत से अधिक का भंडार है। लौह अयस्क खनन सबसे पहले सिंहभूम जिले में 1904 (तब बिहार का एक हिस्सा) में शुरू हुआ। सिंहभूम जिले का लौह अयस्क उच्चतम गुणवत्ता का है और सैकड़ों वर्षों तक चलेगा।

सिंहभूम अपने लौह अयस्क भंडार के लिए जाना जाता है और यह हीरापुर, कुल्टी और बर्नपुर में स्थित इस्को इस्पात संयंत्रों की लौह अयस्क आवश्यकताओं की पूर्ति करता है।

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