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The first multi-purpose project of independent India is / स्वतंत्र भारत की प्रथम बहुउद्देश्यीय परियोजना है

The first multi-purpose project of independent India is / स्वतंत्र भारत की प्रथम बहुउद्देश्यीय परियोजना है

 

(1) Bhakra-Nangal / भाखड़ा-नंगली
(2) Damodar / दामोदर
(3) Hirakud / हीराकुडी
(4) Nagarjunasagar / नागार्जुनसागर

(SSC Combined Matric Level (PRE) Exam. 12.05.2002)

Answer / उत्तर : – 

(2) Damodar / दामोदर

Explanation / व्याख्यात्मक विवरण :-

 

Damodar Valley Corporation came into existence on 7 July, 1948 as the first multipurpose river valley project of independent India. It emerged as a culmination of attempts made over a whole century to control the wild and erratic Damodar River. The river spans over an area of 25,000 km2 covering the states of Bihar (now Jharkhand) & West Bengal.

Damodar Valley Corporation is India’s multi-purpose river valley project. The corporation came into existence on 7 July 1948 as the first multipurpose river valley project of independent India.
The DVC, the heritage of India’s public, originated as an amalgamation of over a century of efforts to control the erratic and erratic Damodar River. The river is spread over an area of ​​25,000 sq km covering the states of Bihar (now Jharkhand) and West Bengal.

The Damodar Valley was subjected to continuous destruction by strong floods, of which its devastating major cataclysm was first recorded in 1730. This was followed by devastating floods at regular intervals, but the floods of 1943 left the mark of its horrific devastation on our memory tables. As a result, the Governor of Bengal constituted a Board of Inquiry headed by the Maharaja of Burdwan and the physicist Dr. Meghnad Saha as a member. In its report, the board suggested the creation of an authority in line with the Tennis Valley Authority (TVA) of the United States. Thereafter the Government of India appointed Shri W.L. Verduin, TVA’s senior engineer to present his recommendation for the integrated development of the valley. Accordingly, in August 1944 Mr. Voorduin submitted a preliminary memorandum on the integrated development of the Damodar River.

Mr. Voorduin’s initial memorandum suggested a multi-purpose development plan designed for flood control, irrigation, power generation and navigation in the Damodar Valley. It was examined by four consultants appointed by the Government of India. He also approved the main technical specifications of Voorduin’s plan and recommended the early start of construction from Tilaiya to Maithon.

By April 1947, the agreement between the Central, West Bengal and Bihar governments for the implementation of the plan was executed practically and in March 1948, for the purpose of forming the Damodar Valley Corporation, three governments—the Central Government and the Government of West Bengal and Bihar (now Keeping in view the need for joint participation of the State Governments of Jharkhand, the Damodar Valley Corporation Act (1948) was passed by the Central Legislature.

दामोदर घाटी निगम 7 जुलाई 1948 को स्वतंत्र भारत की पहली बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना के रूप में अस्तित्व में आया। यह जंगली और अनिश्चित दामोदर नदी को नियंत्रित करने के लिए पूरी सदी में किए गए प्रयासों की परिणति के रूप में उभरा। यह नदी बिहार (अब झारखंड) और पश्चिम बंगाल राज्यों को कवर करते हुए 25,000 किमी 2 के क्षेत्र में फैली हुई है।

दामोदर घाटी निगम भारत का बहूद्देश्यीय नदी घाटी परियोजना है। निगम ७ जुलाई १९४८ को स्वतंत्र भारत की प्रथम बहूद्देशीय नदी घाटी परियोजना के रूप में, अस्तित्व आया।
भारत के जनमानस की धरोहर, डीवीसी, का उद्भव, उच्छृंखल तथा अनियमित दामोदर नदी को नियंत्रित करने के लिए शताब्दी से अधिक तक किये गये प्रयासों के संचयन के रूप में हुआ था। यह नदी बिहार (अब झारखंड) तथा पश्चिम बंगाल के राज्यों को आवृत्त करते हुए २५,००० वर्ग किमी के क्षेत्र में फैली हुई है।

दामोदर घाटी को प्रबलता के बाढ़ द्वारा निरंतर विध्वंस का सामना करना पड़ा जिसमें से इसके विध्वंसकारी प्रमुख प्रलय को प्रथम बार १७३० में रिकार्ड किया। इसके पश्चात् नियमित अंतराल पर विध्वंसक बाढ़ आयी परंतु १९४३ की बाढ़ ने अपनी प्रचंड तबाही की छाप हमारे स्मृति पटल पर छोड़ दिया। इसके परिणामस्वरूप बंगाल के राज्यपाल ने बर्दवान के महाराज की अध्यक्षता तथा भौतिक विज्ञानी डॉ मेघनाद साहा को सदस्य बतौर जाँच बोर्ड का गठन किया। अपने रिपोर्ट में, बोर्ड ने संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के टेनिसी घाटी प्राधिकरण (टीवीए) के अनुरूप एक प्राधिकरण के गठन का सुझाव दिया। तत्पश्चात् भारत सरकार ने श्री डब्ल्यू.एल. वुर्दुइन, टीवीए के वरिष्ठ अभियंता को घाटी की समेकित विकास हेतु अपनी अनुशंसा प्रस्तुत करने के लिए नियुक्त किया। तदनुसार, अगस्त १९४४ में श्री वुर्दुइन ने दामोदर नदी के एकीकृत विकास पर प्रारम्भिक ज्ञापन प्रस्तुत किया।

श्री वुर्दुइन के प्रारम्भिक ज्ञापन ने दामोदर घाटी में बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, विद्युत उत्पादन तथा नौचालन हेतु अभिक्लपित एक बहूद्देशीय विकास योजना का सुझाव दिया। भारत सरकार द्वारा नियुक्त चार परामर्शकों ने इसकी जाँच की। उन्होंने भी वुर्दुइन की योजना के प्रमुख तकनीकी विशिष्टताओं का अनुमोदन किया तथा तिलैया से शुरू कर मैथन तक निर्माण को शीघ्र प्रारम्भ करने की अनुशंसा की।

अप्रैल १९४७ तक योजना के क्रियान्वयन के लिए केन्द्रीय, पश्चिम बंगाल तथा बिहार सरकारों के बीच व्यावहारिक रूप से पूर्णतया करार निष्पादित किया गया तथा मार्च १९४८ में दामोदर घाटी निगम के गठन के उद्देश्य हेतु तीन सरकारों-केन्द्रीय सरकार तथा पश्चिम बंगाल सरकार और बिहार (अब झारखण्ड) के राज्य सरकारों की संयुक्त सहभागिता की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय विधानमंडल द्वारा दामोदर घाटी निगम अधिनियम (1948) पारित किया गया।

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