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Which breed of the following buffalo breeds is found in the South-Western part of Gujarat? / निम्नलिखित भैंसों की कौन-सी नस्ल गुजरात के दक्षिण-पश्चिमी भाग में पाई जाती है?

Which breed of the following buffalo breeds is found in the South-Western part of Gujarat? / निम्नलिखित भैंसों की कौन-सी नस्ल गुजरात के दक्षिण-पश्चिमी भाग में पाई जाती है?

 

(1) Murrah / मुर्राह
(2) Bhadwari / भदवारी
(3) Surti / सुरती
(4) Toda / टोडा

(SSC CISF ASI Exam. 29.08.2010)

Answer / उत्तर : – 

(3) Surti / सुरती

Explanation / व्याख्यात्मक विवरण :-

Important Breeds of Indian Buffaloes and their Characteristics

 

The native tracts of Surti breed is Kaira and Baroda districts of Gujarat. The body is well shaped and medium sized. The barrel is wedge shaped. The head is long with prominent eyes. The horns are sickle shaped, moderately long and flat. The colour is black or brown the peculiarity of breed is two white collars one round the jaw and the other at the brisket. The average milk yield is around 1700kgs. The age at first calving is 40 to 50 months with an intercalving period of 400 – 500 days.

Murrah

It is the best milch breed of buffalo in the world. It is found in all parts of India. Its home area is Rohtak, Hisar, Jind and Karnal districts of Haryana and Delhi and Punjab. Its distinctive color is jet black. The main characteristic of this breed is the presence of small curved horns and white spots on the lower part of the hoof and tail.

Average milk production/calf – 1678 kg. in 307 days
Age of first Vyat 40 to 45 months
Interval between two Vyat – 450 to 500 days

Surti

The home region of this breed of buffalo is Gujarat. It is very popular among the landless, small and marginal farmers because of its small physical structure. The horns of this breed are laughable.

Average milk production/milk – 1400 kg in 352 days
Age of first Vyat 40 to 50 months
The interval between two vyats is 400 to 500 days

Jafrabadi

The breeding area of ​​this breed is Kachhav Jamnagar district of Gujarat. It is the heaviest breed of buffalo. This white mark in its front head is known as ‘Nav Chandra’.

Average milk production/calf is 2150 kg. in 305 days
Milk fat content 7-8%
Age of first calving 35 to 40 months
The interval between two calves is 390 to 480 days

Mehsana

The home region of this breed is Gujarat. It is a medium sized calm nature breed. This breed is originated from the cross of Surti breed and Murra breed of Gujarat.

Milk production / calving ranges from 1200 to 1500 kg.
Milk fat content – about 7%

Bhadavari

This is a unique breed of the world, because the highest amount of milk fat among all the bovine species, the home region of this breed is Gujarat. It is landless, occurs in milk. Hence it is also known as the Ghee Bowl of India. The home area of ​​this breed is Bhadawari Tehsil District Agra and District Etawah of Uttar Pradesh.

Average milk production/calf – 800 kg.
Milk fat content about 13%

Godavari

The home area of ​​this breed is East and West Godavari districts of Andhra Pradesh, this breed is known for good milk production and good milk fat. This breed has immunity against many cow diseases. The origin of this breed is Murrah Naro. The process is known as grading up.

Average milk production/calf is 2150 kg. in 305 days

Nagpuri

This breed is of dual use i.e. males are useful for transport and females are good milch. The home region of this breed is Maharashtra.

Average milk production/calf 1060 kg.

Sambhalpuri

The home area of ​​this breed is Sambalpur district of Orissa, this breed is also found in Bilaspur district of Chhattisgarh. This breed is dual-use.

Milk production/calf from 2300 to 2700 kg. in 340 to 370 days

Terai

It is a medium sized breed and gives sufficient quantity of milk even in less fodder. This breed is found in the Terai regions of Uttar Pradesh and in Uttarakhand.

Average milk production – 1030 kg.

Broke

This breed is named after the Toda tribesmen of South India. The home region of this breed is the Nilgiri hills of Tamil Nadu. This breed originated from adaptation to adverse conditions.

Average milk production/calf is 500 kg.
Milk fat content 8%

Saathkanara

It is a medium sized breed. This breed is found in the coastal areas of Bangalore district of Karnataka.

Average milk production is 600 to 800 kg. in 185 to 260 days

सुरती नस्ल के मूल क्षेत्र गुजरात के कायरा और बड़ौदा जिले हैं। शरीर सुडौल और मध्यम आकार का है। बैरल पच्चर के आकार का है। प्रमुख आंखों वाला सिर लंबा है। सींग दरांती के आकार के, मध्यम रूप से लंबे और चपटे होते हैं। रंग काला या भूरा है, नस्ल की ख़ासियत दो सफेद कॉलर हैं, एक जबड़े के चारों ओर और दूसरा ब्रिस्केट पर। औसत दूध की उपज लगभग 1700 किग्रा है। पहली बार ब्याने की उम्र 40 से 50 महीने होती है और 400-500 दिनों की अंतराल अवधि होती है।

मुर्रा

यह विश्व की सबसे अच्छी भैंस की दुधारू नस्ल है। यह भारत के सभी हिस्सों में पायी जाती है। इसका गृह क्षेत्र हरियाणा के रोहतक, हिसार, जिन्द ब करनाल जिले तथा दिल्ली व पंजाब हैं। इसका विशिष्ट रंग जेट काला है। इस नस्ल की मुख्य विशेषता छोटे मुड़े हुए सँग तथा खुर व पूँछ के निचले हिस्से में सफेद धब्बे का होना हैं।

औसत दुग्ध उत्पादन/ब्यांत- 1678 क्रि.ग्रा. 307 दिनों में
प्रथम व्यात की उम्र 40 से 45 माह
दो व्यात के बीच का अंतराल- 450 से 500 दिन

सुरती

भैंस की इस नस्ल का गृह क्षेत्र गुजरात है। यह भूमिहीन, छोटे व सीमान्त किसानों में बहुत प्रचलित हैं इसका कारण इसकी छोटी शारीरिक बनावट है। इस नस्ल की सींग हाँसियाकार होती है।

औसत दुग्ध उत्पादन/ब्यांत-1400 कि.ग्रा. 352 दिनों में
प्रथम व्यात की आयु 40 से 50 माह
दो व्यात के बीच का अंतराल 400 से 500 दिन

जाफराबादी

इस नस्ल का प्रजनन प्रक्षेत्र गुजरात के कच्छव जामनगर जिले है। यह भैंस की सबसे भारी नस्ल है। इसके अग्र सिर में यह सफेद निशान ‘नव चन्द्र’ के नाम से जाना जाता है।

औसत दुग्ध उत्पादन/ब्यांत 2150 कि.ग्रा. 305 दिनों में
दुग्ध वसा की मात्रा 7-8%
प्रथम ब्यांत की आयु 35 से 40 माह
दो ब्यांत के बीच का अंतराल 390 से 480 दिन

मेहसाना

इस नस्ल का गृह क्षेत्र गुजरात है यह मध्यम आकार की शांत स्वभाव की नस्ल है। इस नस्ल की उत्पत्ति गुजरात की सुरती नस्ल व मुर्रा नस्ल के संकर से हुई है।

दुग्ध उत्पादन/ब्यांत 1200 से 1500 कि.ग्रा.
दुग्ध वसा की मात्रा- लगभग 7%

भदावरी

यह विश्व की एक विलक्षण नस्ल है, क्योंकि समस्त गोजातीय जातियों में सबसे अधिक दुग्ध वसा की मात्रा इसके को इस नस्ल का गृह क्षेत्र गुजरात है। यह भूमिहीन, दुग्ध में होती है। अतः इसे भारत के घी का कटोरा के नाम से भी जाना जाता है। इस नस्ल का गृह क्षेत्र उत्तर प्रदेश की भदावरी तहसील जिला आगरा एवं जिला इटावा है।

औसत दुग्ध उत्पादन/ब्यांत- 800 कि.ग्रा.
दुग्ध वसा की मात्रा लगभग 13%

गोदावरी

इस नस्ल का गृह क्षेत्र आंध्रप्रदेश के पूर्व व पश्चिम गोदावरी जिले हैं, यह नस्ल अच्छे दुग्ध उत्पादन एवं अच्छी दुग्ध वसा के लिए जानी जाती है। इस नस्ल में कई गो जातिया रोगों के विरूद्ध प्रतिरोधक क्षमता होती है। इस नस्ल की उत्पत्ति मुर्रा नरो । की सहायता से मूल निवासी मादाओं के संकर से हुई है, प्रक्रिया ग्रेडिंग अप के नाम से जानी जाती है।

औसत दुग्ध उत्पादन/ब्यांत 2150 कि.ग्रा. 305 दिनों में

नागपुरी

यह नस्ल दोहरे उपयोग की हैं अर्थात नर यातायात हेतु उपयोगी हैं तथा मादा अच्छी दुधारू हैं। इस नस्ल का गृह क्षेत्र महाराष्ट्र हैं।

औसत दुग्ध उत्पादन/ब्यांत 1060 कि.ग्रा.

सांभलपुरी

इस नस्ल का गृह क्षेत्र उड़ीसा का सांभलपुर जिला है, यह नस्ल छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में भी पायी जाती है। यह नस्ल दोहरे उपयोग वाली है।

दुग्ध उत्पादन/ब्यांत 2300 से 2700 कि.ग्रा. 340 से 370 दिनों में

तराई

यह मध्यम आकार की नस्ल है तथा कम चारे में भी पर्याप्त मात्रा में दूध देती है। यह नस्ल उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों में तथा उत्तराखंड में पाई जाती है।

औसत दुग्ध उत्पादन-1030 कि.ग्रा.

टोड़ा

इस नस्ल का नाम दक्षिण भारत के टोड़ा आदिवासियों के नाम पर है। इस नस्ल का गृह क्षेत्र तमिलनाडू की नील गिरी पहाड़ियां है। इस नस्ल की उत्पत्ति प्रतिकूल परिस्थितियों में अनुकूलन से हुई है।

औसत दुग्ध उत्पादन/ब्यांत 500 कि.ग्रा.
दुग्ध वसा की मात्रा 8%

साथकनारा

यह मध्यम आकार की प्रचलित नस्ल है। यह नस्ल कर्नाटक के बंगलौर जिले के समुद्रतटीय क्षेत्रों में पायी जाती है।

औसत दुग्ध उत्पादन 600 से 800 कि.ग्रा. 185 से 260 दिनों में

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