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Which river flows between the Satpuras and the Vindhyas ? / सतपुड़ा और विंध्य के बीच कौन सी नदी बहती है?

Which river flows between the Satpuras and the Vindhyas ? / सतपुड़ा और विंध्य के बीच कौन सी नदी बहती है?

 

(1) Godavari / गोदावरी
(2) Gandak / गंडकी
(3) Tapti / ताप्ती
(4) Narmada / नर्मदा

(SSC (10+2) Level Data Entry Operator & LDC Exam. 28.10.2012)

Answer / उत्तर : – 

(4) Narmada / नर्मदा

Explanation / व्याख्यात्मक विवरण :-

 

Narmada river rises near Amarkantak plateau. Its length is about 1,312 km.

The Narmada, also known as the Rewa, is a river in central India and the fifth longest river in the Indian subcontinent. It is the third longest river flowing inside India after Godavari River and Krishna River. It is also known as the “Lifeline of Madhya Pradesh” due to its immense contribution to the state of Madhya Pradesh. It acts as a traditional border between North and South India. It travels 1,312 km west from its origin and joins the Gulf of Khambhat, Arabian Sea.

Narmada is a major river flowing in the state of Madhya Pradesh and Gujarat in central India. The Narmada river has originated from the Amarkantak peak of Maikal mountain. Its length is usually 1312 kilometers. This river turns west and falls into the Gulf of Khambat.

The Narmada River originates from the Narmada Kund in Amarkantak, located at the eastern junction of the Vindhyachal and Satpura ranges in Anuppur district of Madhya Pradesh. The river flows westwards from Sonmud, falling down a cliff to form a waterfall named Kapildhara. The winding route and with strong velocity cross the dense forests and rocks to reach the dilapidated palace of Ramnagar. Further to the southeast, between Ramnagar and Mandla (25 km (15.5 mi)), the waterway here is relatively straight and with deep water without rocky barriers. The barren river is joined to the left. The river further reaches Jabalpur in the north-west in a narrow loop. Closer to the city, the river forms a 9-metre waterfall near Bhedaghat, popularly known as Dhuandhar, further it flows into a deep narrow channel for about 3 km through magnesium limestone and basalt rocks also known as marble rocks. Here the river is narrowed by its span of 80 meters and flows with a width of only 18 meters. Further from this region till its Milan in the Arabian Sea, the Narmada enters three narrow valleys between the Vindhya belts in the north and the Satpura range in the south. The southern extension of the valley is spread over most of the places.

Emerging from the marble rocks, the river enters its first alluvial soil fertile plain, which is called “Narmada Ghati”. Which extends for about 320 km (198.8 mi), here the average width of the river becomes 35 km (21.7 mi) in the south. In the north, it narrows down to the Barna-Bareilly valley which ends after the Barkhara hills of Hoshangabad. However, from the Kannod plains it again comes down to the hills. It is in the first valley of the Narmada, where several important tributaries join it from the south and bring water from the northern slopes of the Satpura hills. In which: Sher, Shakkar, Dudhi, Tawa (largest tributary) and Ganjal are Sahil. Important tributaries like the Hiran, Barna, Choral, Karam and Lohar are joined from the north.

From Handia and Nemavar down to the Hiran Falls, the river is surrounded by hills on both sides. The character of the river appears different on this part. Omkareshwar Island, which is dedicated to Lord Shiva, is the most important river island of Madhya Pradesh. Sikta and Kaveri come down to Khandwa plain and meet the river. At two places, at Mandhar about 40 km from Nemavar and at Dadrai about 40 km from Pansasa, the river falls from a height of about 12 meters (39.4 ft).

नर्मदा नदी अमरकंटक पठार के पास से निकलती है। इसकी लंबाई करीब 1,312 किमी है।

नर्मदा, जिसे रेवा के नाम से भी जाना जाता है, मध्य भारत की एक नदी और भारतीय उपमहाद्वीप की पांचवीं सबसे लंबी नदी है। यह गोदावरी नदी और कृष्णा नदी के बाद भारत के अंदर बहने वाली तीसरी सबसे लंबी नदी है। मध्य प्रदेश राज्य में इसके विशाल योगदान के कारण इसे “मध्य प्रदेश की जीवन रेखा” भी कहा जाता है। यह उत्तर और दक्षिण भारत के बीच एक पारंपरिक सीमा की तरह कार्य करती है। यह अपने उद्गम से पश्चिम की ओर 1,312 किमी चल कर खंभात की खाड़ी, अरब सागर में जा मिलती है।

नर्मदा, मध्य भारत के मध्य प्रदेश और गुजरात राज्य में बहने वाली एक प्रमुख नदी है। मैकल पर्वत के अमरकण्टक शिखर से नर्मदा नदी की उत्पत्ति हुई है। इसकी लम्बाई प्रायः 1312 किलोमीटर है। यह नदी पश्चिम की तरफ जाकर खम्बात की खाड़ी में गिरती है।

नर्मदा नदी का उद्गम मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वतश्रेणियों के पूर्वी संधिस्थल पर स्थित अमरकंटक में नर्मदा कुंड से हुआ है। नदी पश्चिम की ओर सोनमुद से बहती हुई, एक चट्टान से नीचे गिरती हुई कपिलधारा नाम की एक जलप्रपात बनाती है। घुमावदार मार्ग और प्रबल वेग के साथ घने जंगलो और चट्टानों को पार करते हुए रामनगर के जर्जर महल तक पहुँचती हैं। आगे दक्षिण-पूर्व की ओर, रामनगर और मंडला (25 किमी (15.5 मील)) के बीच, यहाँ जलमार्ग अपेक्षाकृत चट्टानी बाधाओं से रहित सीधे एवं गहरे पानी के साथ है। बंजर नदी बाईं ओर से जुड़ जाता है। नदी आगे एक संकीर्ण लूप में उत्तर-पश्चिम में जबलपुर पहुँचती है। शहर के करीब, नदी भेड़ाघाट के पास करीब 9 मीटर का जल-प्रपात बनाती हैं जो की धुआँधार के नाम से प्रसिद्ध हैं, आगे यह लगभग 3 किमी तक एक गहरी संकीर्ण चैनल में मैग्नीशियम चूनापत्थर और बेसाल्ट चट्टानों जिसे संगमरमर चट्टान भी कहते हैं के माध्यम से बहती है, यहाँ पर नदी 80 मीटर के अपने पाट से संकुचित होकर मात्र 18 मीटर की चौड़ाई के साथ बहती हैं। आगे इस क्षेत्र से अरब सागर में अपनी मिलान तक, नर्मदा उत्तर में विंध्य पट्टियों और दक्षिण में सतपुड़ा रेंज के बीच तीन संकीर्ण घाटियों में प्रवेश करती है। घाटी का दक्षिणी विस्तार अधिकतर स्थानों पर फैला हुआ है।

संगमरमर चट्टानों से निकलते हुए नदी अपनी पहली जलोढ़ मिट्टी के उपजाऊ मैदान में प्रवेश करती है, जिसे “नर्मदाघाटी” कहते हैं। जो लगभग 320 किमी (198.8 मील) तक फैली हुई है, यहाँ दक्षिण में नदी की औसत चौड़ाई 35 किमी (21.7 मील) हो जाती है। वही उत्तर में, बर्ना-बरेली घाटी पर सीमित होती जाती है जो की होशंगाबाद के बरखरा पहाड़ियों के बाद समाप्त होती है। हालांकि, कन्नोद मैदानों से यह फिर पहाड़ियों में आ जाती हैं। यह नर्मदा की पहली घाटी में है, जहां दक्षिण की ओर से कई महत्वपूर्ण सहायक नदियाँ आकर इसमें शामिल होती हैं और सतपुड़ा पहाड़ियों के उत्तरी ढलानों से पानी लाती हैं। जिनमे: शेर, शक्कर, दुधी, तवा (सबसे बड़ी सहायक नदी) और गंजल साहिल हैं। हिरन, बारना, चोरल , करम और लोहर, जैसी महत्वपूर्ण सहायक नदियां उत्तर से आकर जुड़ती हैं।

हंडिया और नेमावर से नीचे हिरन जल-प्रपात तक, नदी दोनों ओर से पहाड़ियों से घिरी हुई है। इस भाग पर नदी का चरित्र भिन्न दिखाई देता है। ओंकारेश्वर द्वीप, जोकि भगवान शिव को समर्पित हैं, मध्य प्रदेश का सबसे महत्वपूर्ण नदी द्वीप है। सिकता और कावेरी, खण्डवा मैदान के नीचे आकर नदी से मिलते हैं। दो स्थानों पर, नेमावर से करीब 40 किमी पर मंधार पर और पंसासा के करीब 40 किमी पर ददराई में, नदी लगभग 12 मीटर (39.4 फीट) की ऊंचाई से गिरती है।

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