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India leads the world in the export of / के निर्यात में भारत दुनिया में सबसे आगे है

India leads the world in the export of / के निर्यात में भारत दुनिया में सबसे आगे है

 

(1) coffee / कॉफी
(2) cotton / कपास
(3) manganese / मैंगनीज
(4) mica / अभ्रक

(SSC Combined Matric Level (PRE) Exam. 27.05.2001)

Answer / उत्तर : –

(4) mica / अभ्रक

 

अभ्रक इतिहास देखें अर्थ और सामग्री - hmoob.in

 

Explanation / व्याख्यात्मक विवरण :-

India is one of the leading suppliers of mica to the world. India alone accounts for a major portion of the world`s export of block mica and mica splitting. India produces approximate 90 % of the world`s mica.

Mica is a naturally occurring stone that is extracted from stones that contain silica in its purest and highest form. It is a mineral used for many daily activities. This mineral mainly consists of non-fibrous plates and silicate materials. Granite is one of the main sources of mica. India is the largest producer and the monopoly when it comes to mica production. India produces 60% of the world’s mica. In India, mica mines are found mainly in three states. These are Jharkhand, Rajasthan and Andhra Pradesh. 95% of the country’s mica is extracted solely from these three states.
 
Note: Mica is a mineral that is extracted mainly from Metamorphic rocks. The main source for mica sheets is the pegmatite deposits. It comes to us in various colours of silver, gold, purple etc. This is entirely a fact-based question. The students are required to memorize it for examination purposes.

Mica is a mineral that is found as a layer in igneous and metamorphic rocks. It is colorless or light yellow, green or black in color.

Chemically it is a complex silicate compound, which is not affected by acids.

80% of the world’s need for mica is found in India, the names of the first three countries in mica production can be remembered with the help of this trick:

It extends from Gaya district in the west to the district of Hazaribagh and Munger in the east to Bhagalpur district in the east with a length of about 90 miles and a width of 12-16 miles. Its most productive area is confined to Koderma and surrounding areas. The best type of red (ruby) mica is found in Bihar, for which this state is famous all over the world.

Andhra Pradesh, which is one of the largest mica producing state, is situated between the belt of Nellore district of Nellore and Sangam.

Rajasthan ranks second in the production of Indian mica. The mica belt of Rajasthan extends from Jaipur to Udaipur and pigments are found in it.

Use:
Its thin layers also have the ability to hold electricity (a poor conductor of electricity) and due to which it is used in many electrical devices like condenser, commutator, telephone, dynamo etc.

Due to being transparent and insulating (a bad conductor of heat), it is used in lamp chimneys, stoves, furnaces etc.

Small pieces of it are used in rubber industry, in making paint, for lubrication in machines and for decoration of cards etc.

Its ash is a very popular medicine in Ayurveda medicine, which is used in the diagnosis of diseases like tuberculosis, prameha, stones etc.

Rank Country World Production, By Country (Metric tons)
1 China 780,000 780000
2 Russian Federation 100,000 100000
3 Finland 53,394 53394
4 United States 48,100 48100
5 Korea, Republic Of 30,000 30000
6 Canada 22,000 22000
7 France 20,000 20000
8 India 14,250 14250
9 Argentina 10,000 10000
10 Madagascar 9,600 9600
11 Taiwan, Province Of China 8,931 8931
12 Brazil 6,200 6200
13 Iran, Islamic Republic Of 5,000 5000
14 Malaysia 4,000 4000
15 Spain 3,850 3850
16 Sri Lanka 3,000 3000
17 South Africa 400 400
18 Sudan 160 160
19 Peru 90 90

 

भारत दुनिया को अभ्रक के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। अकेले भारत ब्लॉक अभ्रक और अभ्रक विभाजन के दुनिया के निर्यात का एक बड़ा हिस्सा है। भारत विश्व के लगभग 90% अभ्रक का उत्पादन करता है।

अभ्रक एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला पत्थर है जिसे उन पत्थरों से निकाला जाता है जिनमें अपने शुद्धतम और उच्चतम रूप में सिलिका होता है। यह एक खनिज है जिसका उपयोग कई दैनिक गतिविधियों के लिए किया जाता है। इस खनिज में मुख्य रूप से गैर-रेशेदार प्लेट और सिलिकेट सामग्री होती है। ग्रेनाइट अभ्रक के मुख्य स्रोतों में से एक है। अभ्रक उत्पादन की बात करें तो भारत सबसे बड़ा उत्पादक और एकाधिकार है। भारत विश्व के 60% अभ्रक का उत्पादन करता है। भारत में अभ्रक की खदानें मुख्यतः तीन राज्यों में पाई जाती हैं। ये हैं झारखंड, राजस्थान और आंध्र प्रदेश। देश का 95% अभ्रक इन्हीं तीन राज्यों से निकाला जाता है।

नोट: अभ्रक एक खनिज है जो मुख्य रूप से मेटामॉर्फिक चट्टानों से निकाला जाता है। अभ्रक की चादरों का मुख्य स्रोत पेगमेटाइट जमा है। यह चांदी, सोना, बैंगनी आदि विभिन्न रंगों में हमारे पास आता है। यह पूरी तरह से एक तथ्य-आधारित प्रश्न है। छात्रों को परीक्षा उद्देश्यों के लिए इसे याद रखना आवश्यक है।

अभ्रक एक खनिज है जो आग्नेय एवं कायांतरित चट्टानों में परत के रूप में पाया जाता हैं। यह रंगरहित या हलके पीले, हरे या काले रंग का होता है।

रासायनिक रूप से यह एक जटिल सिलिकेट यौगिक है, जिस पर अम्लों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

पूरी दुनिया का जरूरत का 80% अभ्रक भारत में ही मिलता है अभ्रक उत्पादन में प्रथम तीन देशों के नाम इस ट्रिक की मदद से याद रख सकते हैं:

बिहार की यह पश्चिम में गया जिले से हजारीबाग तथा मुंगेर होती हुई पूरब में भागलपुर जिले तक लगभग ९० मील की लंबाई और १२-१६ मील की चौड़ाई में फैली हुई है। इसका सर्वाधिक उत्पादक क्षेत्र कोडर्मा तथा आसपास के क्षेत्रों में सीमित है। बिहार में सबसे अच्छे प्रकार का लाल (रूबी) अभ्रक पाया जाता है जिसके लिए यह प्रदेश संपूर्ण संसार में प्रसिद्ध है।

आंध्र प्रदेश जो कि सर्वाधिक अभ्रक उत्पादक राज्य में से है, के नेल्लोर जिले की पेटिका दूर तथा संगम के मध्य स्थित है।

भारतीय अभ्रक के उत्पादन में राजस्थान का द्वितीय स्थान है। राजस्थान की अभ्रक पेटिका जयपुर से उदयपुर तक फैली है तथा उसमें पिगमेटाइट मिलते हैं।

उपयोग:
इसकी पतली-पतली परतों में भी विद्युत्‌ रोकने की क्षमता होती है (विद्युत्‌ का कुचालक) और जिसके कारण इसका उपयोग अनेक बिजली के उपकरणों जैसे कंडेंसर, कम्यूटेटर, टेलीफोन, डायनेमो आदि में होता है।

पारदर्शक तथा तापरोधक (ऊष्मा का कुचालक) होने के कारण यह लैंप की चिमनी, स्टोव, भट्ठियों आदि में प्रयुक्त होता है।

इस के छोटे-छोटे टुकड़े रबड़ उद्योग में, रंग बनाने में, मशीनों में चिकनाई देने के लिए तथा मानपत्रों आदि की सजावट के काम आते हैं।

आयुर्वेद चिकित्सा में इसके भस्म काफी प्रचलित औषधि है जो क्षय, प्रमेह, पथरी आदि रोगों के निदान में प्रयुक्त होती है।

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