Geography | GK | GK MCQ

Terrace farming is done / टेरेस खेती की जाती है

Terrace farming is done / टेरेस खेती की जाती है

 

(1) on the slope of hills / पहाड़ियों की ढलान पर
(2) in dry regions / शुष्क क्षेत्रों में
(3) on rooftops / छतों पर
(4) on mountain tops / पहाड़ की चोटियों पर

(SSC (10+2) Level Data Entry Operator & LCD Exam. 04.12.2011)

Answer / उत्तर : –

(1) on the slope of hills / पहाड़ियों की ढलान पर

What Is Terrace Farming? - PlantSnap

 

Explanation / व्याख्यात्मक विवरण :-

In agriculture, a terrace is a piece of sloped plane that has been cut into a series of successively receding flat surfaces or platforms, which resemble steps, for the purposes of more effective farming. Graduated terrace steps are commonly used to farm on hilly or mountainous terrain. Terraced fields decrease erosion and surface runoff, and are effective for growing crops requiring much water, such as rice.

Terraced field

This is a common practice of farming on hill slopes for generations. By this method, the soil and soil moisture are conserved by breaking/shortening the length of the slope and reducing the intensity of the slope. Terraced field irrigation is also necessary for effective use of water. To make these types of fields, the basic form (sharp slope) is constructed one after the other in a ladder-like shape with the help of agricultural implements. The flat strips thus formed are strengthened with the help of shoulder straps.

Terraced farming, however, requires a lot of labor and skill. Plowing the terraced fields with ancient machines is also a difficult task.
Suitability: In hilly areas generally up to 33% slope can be converted into terraced fields.

कृषि में, एक छत ढलान वाले विमान का एक टुकड़ा है जिसे क्रमिक रूप से घटती सपाट सतहों या प्लेटफार्मों की एक श्रृंखला में काट दिया गया है, जो कि अधिक प्रभावी खेती के प्रयोजनों के लिए कदमों के समान हैं। आमतौर पर पहाड़ी या पहाड़ी इलाकों में खेती के लिए ग्रैजुएट टैरेस सीढि़यों का इस्तेमाल किया जाता है। सीढ़ीदार खेत कटाव और सतही अपवाह को कम करते हैं, और चावल जैसे अधिक पानी की आवश्यकता वाली फसलों को उगाने के लिए प्रभावी होते हैं।

सीढ़ीदार खेत

यह पहाड़ी ढ़लानों पर खेती करने की पीढ़ियों से चली आ रही सामान्य विधि है। इस विधि द्वारा ढाल की लम्बाई को तोड़कर / छोटाकर एवं ढ़ाल की तीब्रता को कम करके मृदा एंव मृदा नमी का संरक्षण किया जाता है। सीढ़ीदार खेत सिंचाई जल का प्रभावी उपयोग हेतु भी आवश्यक है। इस प्रकार के खेतों को बनाने के लिए मूल रूप (तीब्र ढलान) को कृषि उपकरणों के सहयोग से सीढ़ीनुमा आकार में एक के बाद एक समतल या लगभग समतल पट्टियों का निर्माण किया जाता है। इस प्रकार बनाई गई समतल पट्टियों को स्कंधबंध की सहायता से दृढ़ता प्रदान की जाती है।

सीढ़ीदार खेती में हालांकि अत्यधिक श्रम तथा दक्षता की आवश्यकता होती है। सीढ़ीदार खेतों को पुरातन यंत्रों से जोतना एक कठिन कार्य भी है।
उपयुक्तता: पहाड़ी क्षेत्रों में सामान्यतया 33 प्रतिशत ढाल तक के क्षेत्रों को सीढ़ीदार खेतों में बदला जा सकता है।

Similar Posts

Leave a Reply