| |

The culture of silkworms is known as / रेशमकीटों की संस्कृति को कहा जाता है

The culture of silkworms is known as / रेशमकीटों की संस्कृति को कहा जाता है

 

(1) Apiculture / मधुमक्खी पालन
(2) Horticulture / बागवानी
(3) Pisciculture / मछलीपालन
(4) Sericulture / रेशम उत्पादन

(SSC Combined Matric Level (PRE) Exam. 24.10.1999)

Answer / उत्तर : –

(4) Sericulture / रेशम उत्पादन

Explanation / व्याख्यात्मक विवरण :-

रेशम कीट पालन क्या है। रेशम कीट पालन पर निबंध। Sericulture

Sericulture, or silk farming, is the rearing of silkworms for the production of raw silk. Although there are several commercial species of silkworms, Bombyx mori is the most widely used and intensively studied. Today, China and India are the two main silk producers, together manufacturing more than 60% of the world production.

रेशम उत्पादन, या रेशम की खेती, कच्चे रेशम के उत्पादन के लिए रेशम के कीड़ों का पालन है। हालांकि रेशम के कीड़ों की कई व्यावसायिक प्रजातियां हैं, बॉम्बेक्स मोरी सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है और गहन अध्ययन किया जाता है। आज, चीन और भारत दो मुख्य रेशम उत्पादक हैं, जो एक साथ विश्व उत्पादन का 60% से अधिक उत्पादन करते हैं।

रेशम कीट पालन क्या है  

रेशम का उत्पादन रेशम के कीड़े द्वारा होता है, जिसे हम ‘रेशमकीट पालन’ या सेरीकल्चर कहते है | भारी मात्रा में रेशम उत्पादन के लिए रेशम उत्पादक जीवों का पालन करना होता है। रेशम की बढ़ती मांग के कारण अब यह एक उद्योग बन चुका है, जिसे हम कृषि आधारित कुटीर उद्योग कहते है। सबसे खास बात यह है, कि इस उद्योग को बहुत ही कम लागत में लगाया जा सकता है और आप यह कार्य कृषि कार्यों और अन्य घरेलू कार्यों के साथ बड़ी आसानी से कर सकते है |  रेशम उत्पादन के मामले में विश्व में चीन के बाद भारत दूसरे स्थान पर आता है।

दरअसल रेशम के उत्पत्ति चीन में हुई थी और इस मामले में यदि हम भारत की बात करें, तो रेशम भारत में रचा बसा है | आपको बता दें, कि रेशम के कई प्रकार हैं और उन सभी का उत्पादन किसी न किसी भारतीय क्षेत्र में अवश्य होता है। वर्तमान समय में रेशम उत्पादन का कार्य भारत के अलावा जापान, रूस, ब्राजील, इटली, फ्रांस जैसे देशों में भारी मात्र में किया जा रहा है।

रेशम की किस्में (Silk Strands)

आज के दौर में रेशम की बढ़ती मांग को देखते हुए व्यवसायिक रूप से रेशम की किस्में 5 प्रकार की होती है, जो रेशम कीट के विभिन्न प्रजातियों से प्राप्त होती हैं | इनके नाम इस प्रकार है –

  • शहतूती रेशम |
  • गैर शहतूती रेशम |
  • एरी या अरंडी रेशम |
  • मूंगा रेशम |
  • ओक तसर रेशम |
  • तसर (कोसा) रेशम |
What is silkworm rearing

Silk is produced by silkworms, which we call ‘silkworm rearing’ or sericulture. Large quantities of silk production require the rearing of silk-producing organisms. Due to the increasing demand for silk, it has now become an industry, which we call agro-based cottage industry. The most important thing is that this industry can be set up at very low cost and you can do this work very easily along with agricultural works and other household works. In the case of silk production, India comes second in the world after China.

Actually silk originated in China and in this case if we talk about India, then silk is settled in India. Let us tell you that there are many types of silk and all of them must be produced in some or the other Indian region. At present, the work of silk production is being done in large quantities in countries like Japan, Russia, Brazil, Italy, France besides India.

Silk Strands

In view of the increasing demand for silk in today’s era, there are 5 types of commercial silk, which are obtained from different species of silkworm. Their names are as follows –

  • Mulberry silk 
  • non-mulberry silk 
  • Eri or castor silk 
  • coral silk 
  • oak tasar silk 
  • Tasar (Kosa) silk 

Similar Posts

Leave a Reply