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The river on which the reservoir for Indira Gandhi Canal has been built is / इंदिरा गांधी नहर के लिए जलाशय किस नदी पर बना है?

The river on which the reservoir for Indira Gandhi Canal has been built is / इंदिरा गांधी नहर के लिए जलाशय किस नदी पर बना है?

 

(1) Sutlej / सतलुज
(2) Ravi / रवि
(3) Luni / लूनि
(4) Jhelum / झेलम

(SSC (10+2) Level Data Entry Operator & LCD Exam. 04.12.2011)

Answer / उत्तर : – 

(1) Sutlej / सतलुज

Explanation / व्याख्यात्मक विवरण :-

The Indira Gandhi Canal starts from the Harike Barrage at Sultanpur, a few kilometers below the confluence of the Sutlej and Beas rivers in Punjab state. The reservoir for the canal is built on the Sutlej River.

The 649 km long Indira Gandhi Canal, which was cut through the chest of the Thar desert, is no less than a surprise in itself.

This is the story of how a person changed the atmosphere of the desert on the strength of his courage. Once again by bringing water from the Himalayas in the desert created by the Saraswati river, which disappeared centuries ago. This is the only example of bringing water in this way in the miles long desert in the world.

In the vast Thar desert, there was once nothing to be seen except sandy gorges for miles long distance, there now greenery prevails. Deserted areas have become populated. Due to this canal which became the lifeline of Rajasthan, the desert has now completely changed. The population of ten big cities, including Jodhpur-Bikaner, is completely dependent on the water of this canal to saturate. Along with this, this canal, which runs exactly parallel to the Indo-Pak border, also acts as a security line.

was not easy to build
In the Thar desert, it was a very difficult task in itself to make a canal by removing the soil of sandy gorges in the length of hundreds of kilometers and leveling them. This was the reason that it took many years to build the canal. There was a lack of machines at that time. In such a situation, the soil was removed through camels. There were also many allegations of scams in canal construction. But once people started getting the benefit of this canal, people forgot everything. Today the desert districts of Rajasthan cannot be imagined without this canal. The canal brought water to an area that had barely received ten inches of rain in the first year. Now greenery is blooming everywhere in the desert.

not a canal but a river
This canal, which has become a lifeline for Rajasthan, is actually like a river due to its size and length. The canal starts from the Harike barrage at the confluence of the Sutlej and Beas rivers near Firazpur in Punjab. The longest canal of the country is 649 km long. Out of this, there is a feeder canal of 204 km from Punjab to Rajasthan. At the same time, 445 km is the main city. On the border of Rajasthan, the depth of this canal is 21 feet and the width of the bottom is 134 feet and the surface is 218 feet wide. Nine branches originate from the main canal, which extends from Masitawali of Hanumangarh to Mohangarh in Jaisalmer. Its distribution for irrigation is 9,245 km long. The people of the ten desert districts of Rajasthan are submerged in the water of this canal. Apart from this, the canal also provides water for many power projects. After the death of the then Prime Minister Indira Gandhi, on 2 November 1984, the state government changed its name from Rajasthan Canal to Indira Gandhi Canal.

that’s how it started
Kanwar Sen, the engineer of the Irrigation Department of Bikaner, first envisaged to irrigate the desert by bringing water from Punjab. In the year 1948, he prepared the outline of the huge Rajasthan Canal, later the Indira Gandhi Canal. His plan was that through this canal irrigation facility could be made available in an area of ​​twenty thousand square kilometers. The then Maharaja of Bikaner Ganga Singh placed this plan before the Central Government. After long deliberations, the Central Government approved this project. Union Home Minister Govind Vallabh Pant laid its foundation stone on 31 March 1958. January 1, 1987 will be marked in golden letters for the Thar desert, when the Himalayan waters traversing the vast desert reached Mohangarh in Jaisalmer after traveling 649 km.

water system like this
In 1960, a treaty was signed between India and Pakistan on the sharing of water. Under this, India got rights over the waters of Ravi, Beas and Sutlej rivers. It was agreed to bring the waste water of these three rivers to Pakistan through this canal in the desert. Rajasthan was decided to get 7.6 million acre feet of water through this canal.

इंदिरा गांधी नहर पंजाब राज्य में सतलुज और ब्यास नदियों के संगम से कुछ किलोमीटर नीचे सुल्तानपुर में हरिके बैराज से शुरू होती है। नहर के लिए जलाशय सतलुज नदी पर बनाया गया है।

थार के रेगिस्तान का सीना चीर कर निकाली गई 649 किलोमीटर लम्बी इंदिरा गांधी नहर अपने आप में किसी आश्चर्य से कम नहीं है।

यह कहानी है कि किस तरह इंसान ने अपनी हिम्मत के दम पर रेगिस्तान की फिजा ही बदल कर रख दी। सदियों पहले लुप्त हुई सरस्वती नदी के कारण उपजे रेगिस्तान में हिमालय से पानी लाकर एक बार फिर सरसब्ज कर दिखाया है। दुनिया में मीलों लम्बे रेगिस्तान में इस तरह पानी लाने का यह इकलौता उदाहरण है।

विशाल थार के रेगिस्तान में कभी मीलों लम्बी दूरी तक रेतीले धोरों के सिवाय कुछ नजर नहीं आता था वहां अब हरियाली छाई रहती है। वीरान क्षेत्र आबाद हो चुके है। राजस्थान की जीवन रेखा बनी इस नहर की वजह से रेगिस्तान अब पूरी तरह से बदल चुका है। जोधपुर-बीकानेर सहित दस बड़े शहरों की आबादी हलक तर करने के लिए पूरी तरह से इस नहर के पानी पर निर्भर है। साथ ही भारत-पाक सीमा के बिलकुल समानान्तर चलने वाली यह नहर सुरक्षा लाइन का भी काम करती है।

आसान नहीं था निर्माण
थार के रेगिस्तान में सैकड़ों किलोमीटर की लम्बाई में रेतीले धोरों की मिट्‌टी को हटा कर उन्हें समतल कर नहर बनाना अपने आप ने बेहद मुश्किल कार्य रहा। यहीं कारण रहा कि नहर बनने में कई साल लग गए। उस दौर में मशीनों का अभाव था। ऐसे में ऊंटों के माध्यम से मिट्‌टी को हटाया जाता था। नहर निर्माण में घोटालों के बहुत आरोप भी लगे। लेकिन एक बार जब इस नहर का लाभ मिलना शुरू हुआ तो लोग सब भूल गए। आज इस नहर के बगैर राजस्थान के रेगिस्तानी जिलों की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इस नहर ने ऐसे क्षेत्र में पानी पहुंचा दिया जहां पहले साल में महज दस इंच बारिश ही मुश्किल से होती थी। अब रेगिस्तान में हर तरफ हरियाली लहलहा रही है।

नहर नहीं बल्कि नदी है
राजस्थान के लिए जीवन रेखा बन चुकी यह नहर वास्तव में अपने आकार व लम्बाई के कारण एक नदी के समान है। नहर पंजाब के फिरजपुर के निकट सतलज व ब्यास नदी के संगम पर बने हरिके बैराज से शुरू होती है। देश की सबसे लम्बी यह नहर 649 किलोमीटर लम्बी है। इसमें से पंजाब से राजस्थान तक 204 किलोमीटर फीडर नहर है। वहीं 445 किलोमीटर मुख्य नगर है। राजस्थान की सीमा पर इस नहर की गहराई 21 फीट व तल की चौड़ाई 134 फीट व सतह 218 फीट चौड़ी है। हनुमानगढ़ के मसीतावाली से लेकर जैसलमेर के मोहनगढ़ तक फैली मुख्य नहर से नौ शाखाएं निकलती है। सिंचाई के लिए इसकी वितरिकाएं 9,245 किलोमीटर लम्बी है। राजस्थान के दस रेगिस्तानी जिलों के लोगों के हलक इस नहर के पानी से तर होते है। इसके अलावा कई बिजली परियोजनाओं के लिए भी पानी यहीं नहर उपलब्ध कराती है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निधन के पश्चात 2 नवम्बर 1984 को राज्य सरकार ने इसका नाम राजस्थान नहर से बदल कर इंदिरा गांधी नहर कर दिया।

ऐसे हुई थी शुरुआत
बीकानेर के सिंचाई विभाग के अभियंता कंवर सेन ने सबसे पहले रेगिस्तान में पंजाब से पानी लाकर सिंचाई करने की परिकल्पना की। उन्होंने वर्ष 1948 में विशाल राजस्थान नहर बाद में इंदिरा गांधी नहर की रूपरेखा तैयार की। उनकी योजना थी कि इस नहर के जरिए बीस हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। बीकानेर के तत्कालीन महाराजा गंगासिंह ने यह योजना केन्द्र सरकार के समक्ष रखी। लम्बे विचार विमर्श के पश्चात केन्द्र सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी प्रदान की। 31 मार्च 1958 को केन्द्रीय गृह मंत्री गोविन्द वल्लभ पंत ने इसकी आधारशिला रखी। थार के रेगिस्तान के लिए एक जनवरी 1987 का दिन स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेगा जब विशाल रेगिस्तान को चीरते हुए हिमालय का पानी 649 किलोमीटर का सफर तय कर जैसलमेर के मोहनगढ़ पहुंचा।

ऐसे की गई पानी की व्यवस्था
वर्ष 1960 में भारत-पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे को लेकर संधि हुई। इसके तहत भारत को रावी, ब्यास व सतलुज नदी के पानी पर अधिकार मिला। इन तीनों नदियों के फालतू बहकर पाकिस्तान जाने वाले पानी को इस नहर के माध्यम से रेगिस्तान में लाने पर सहमति बनी। इस नहर के माध्यम से राजस्थान को 7.6 मिलियन एकड़ फीट पानी मिलना तय हुआ।

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