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The Kharif crops are harvested in : / खरीफ फसलों की कटाई की जाती है: 

The Kharif crops are harvested in : / खरीफ फसलों की कटाई की जाती है: 

 

(1) October — November / अक्टूबर-नवंबर
(2) May — June / मई – जून
(3) March — April / मार्च-अप्रैल
(4) June — July / जून-जुलाई

(SSC (10+2) Level Data Entry Operator & LDC Exam. 21.10.2012)

Answer / उत्तर : –

(1) October — November / अक्टूबर-नवंबर

Improvement in Crop Yield Who doesn't like to eat food? Food is the basic need of all living organisms on Earth. The human population has soared well beyond 7 billions around the globe. This has increased our demand for food. In addition to feeding ...

 

Explanation / व्याख्यात्मक विवरण :-

The principal kharif crops are : jowar, maize, cotton, groundnut, jute, tobacco, sugarcane, bajra, pulses, green vegetables, gourd, lady’s finger etc.vThese are mainly summer season’s crops. These require much water and long hot season. The Kharif crops are harvested in October-November.

What is Kharif crop? ,

Kharif crops, also known as monsoon crops, are crops grown during the rainy season. The word Kharif is an Arabic word for Kharif crops. In Arabic, the word literally means autumn. The advent of this word in India coincided with the arrival of the Mughal emperor, since then this word is widely used in our country.

Harvest profitable Kharif crop in September-October by sowing in June-July:

After knowing the Kharif crop, now the question comes in our mind that when is the Kharif crop sown? , The Kharif crop in India is usually sown after the first rains during the arrival of the Southwest Monsoon. These crops are harvested at the end of the monsoon which usually falls between the months of June-July to September-October in India.

Note: India is a huge country, so the sowing time of Kharif crop may be different because the sowing of these crops depends on the arrival of monsoon. For example, in the states of South India, where the monsoon arrives first, the sowing of these crops starts earlier. On the contrary, in the states of northern India, this monsoon comes after some time, so the sowing of kharif ki fasal is done there after some time.

More at the time of sowing and growth, while at the time of ripening of crops, they demand lower temperature. Kharif crop:

Kharif crops, unlike rabi crops, demand higher temperature and humidity at the time of sowing and growth while relatively lower temperature at the time of ripening of crops. Most of the crops of this class are low photo tolerant.

Monsoon plays the most important role in the production of Kharif crops:

The water demand of Kharif crop is higher than that of other crops. The growth, development and reproduction of these crops depends on the pattern of monsoon. The timing and quantity of rainwater greatly affect the production of these crops. This is the reason that in the year when the monsoon conditions are good in the country, an increase in the production of these crops is recorded, whereas in the presence of the opposite monsoon, its production has a negative effect.

Paddy is the most important crop of Kharif:

Paddy is one of the most important Kharif crops which is produced on a large scale in our country. It is a plant with a dry climate. It grows well in areas with high humidity, long days as well as high water availability. The average temperature for paddy plants is considered to be between 21 degree centigrade to 37 degree centigrade. On the other hand, if we talk about their germination, then 28 degree centigrade to 32 degree centigrade temperature is considered suitable. Whereas at the time of flowering, this plant demands temperature from 26 degree centigrade to 29 degree centigrade and 20 to 25 degree centigrade at the time of ripening.

Examples of some other important Kharif crops.

The main crops of Kharif season are paddy, bajra, maize, jowar, cotton, structure, moong, groundnut and cowpea etc. Apart from this, the production of some other important crops also goes during the Kharif season.

प्रमुख खरीफ फसलें हैं: ज्वार, मक्का, कपास, मूंगफली, जूट, तंबाकू, गन्ना, बाजरा, दालें, हरी सब्जियां, लौकी, भिंडी आदि। ये मुख्य रूप से गर्मी के मौसम की फसलें हैं। इनके लिए बहुत अधिक पानी और लंबे गर्म मौसम की आवश्यकता होती है। खरीफ की फसल अक्टूबर-नवंबर में काटी जाती है।

खरीफ की फसल क्या है ? |

खरीफ की फसल जिसे मानसून की फसल के रूप में भी जाना जाता है, ऐसी फसलें होती है जिस का उत्पादन वर्षा ऋतु के दौरान की जाती है। खरीफ की फसल (kharif crops in hindi) में खरीफ शब्द अरबी भाषा का एक शब्द है। अरबी भाषा में इस शब्द का शाब्दिक अर्थ शरद ऋतु से है। भारत में इस शब्द का आगमन मुगल सम्राट के आगमन के साथ हुआ तभी से यह शब्द हमारे देश में व्यापक रूप से प्रयोग होता है।

जून-जूलाई मे बो कर सितंबर-अक्टूबर में काटें मुनाफे की खरीफ की फसल :

खरीफ की फसल को जान लेने के बाद अब हमारे मन मे यह सवाल आता है कि आखिर खरीफ की फसल कब बोई जाती है ? । भारत में खरीफ की फसल को आमतौर पर दक्षिण पश्चिमी मानसून के आगमन के दौरान होने वाली पहली बारिश के बाद बोई जाती है। इन फसलों की कटाई मानसून के अंत में की जाती है जो भारत में आमतौर पर जून जूलाई माह से लेकर सितंबर अक्टूबर माह तक के बीच में पड़ता है।

Note : भारत एक विशाल देश है अतः खरीफ की फसल की बुवाई का समय अलग अलग हो सकता है क्योंकि इन फसलों की बुवाई मानसून के आगमन पर निर्भर करता है। उदाहरण के तौर पर देखा जाए तो दक्षिण भारत के राज्यों में जहां मानसून का आगमन सबसे पहले होता है वहां पर इन फसलों की बुवाई पहले आरंभ हो जाती है। इसके विपरीत उत्तरी भारत के राज्यों में यही मानसून कुछ देर बाद आती है तो वहां पर kharif ki fasal बुवाई कुछ देर बाद की जाती है।

बुवाई व वृद्धि के समय अधिक तो वहीं फसलों के पकते समय कम तापमान की मांग करते है खरीफ की फसल :

खरीफ की फसल ,रबी की फसल के विपरीत बुवाई एवं वृद्धि के समय अधिक तापमान व आद्रता जबकि फसलों के पकते समय अपेक्षाकृत कम तापमान की मांग करते हैं। इस वर्ग की अधिकतर फसलें अल्प प्रकाश पोषी होती है।

खरीफ की फसलों के उत्पादन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है मानसून :

खरीफ की फसल की जल मांग अन्य फसलों की तुलना में अधिक होती है। इन फसलों की वृद्धि, विकास एवं प्रजनन मानसून की पैटर्न पर निर्भर करता है। वर्षा जल का समय व मात्रा इन फसलों के उत्पादन को काफी प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि जिस वर्ष देश में मानसून की स्थिति अच्छी होती है उस वर्ष इन फसलों के उत्पादन में वृद्धि दर्ज की जाती है जबकि विपरीत मानसून की उपस्थिति में इसके उत्पादन में नकारात्मक प्रभाव पड़ता हैं।

धान है खरीफ की सबसे महत्वपूर्ण फसल :

धान खरीफ की सबसे महत्वपूर्ण फसलों में से एक है जिस का उत्पादन हमारे देश में बड़े पैमाने पर की जाती है। यह एक शुष्क जलवायु वाला पौधा है। यह उन क्षेत्रों में अच्छी तरह से उगता है जहां पर आद्रता अधिक, दिन लंबे साथ ही साथ पानी की उपलब्धता अधिक होती है। धान के पौधों के लिए औसतन तापमान 21 डिग्री सेंटीग्रेड से लेकर 37 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच उपयुक्त माना जाता है। वहीं यदि उनके अंकुरण की बात की जाए तो यह 28 डिग्री सेंटीग्रेड से लेकर 32 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान उपयुक्त माना जाता है। जबकि फूल आने के समय यह पौधा 26 डिग्री सेंटीग्रेड से लेकर 29 डिग्री सेंटीग्रेड एवं पकते समय 20 से 25 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान की मांग करता है।

कुछ अन्य महत्वपूर्ण खरीफ की फसल के उदाहरण |

खरीफ ऋतु की मुख्यतः धान, बाजरा, मक्का, ज्वार, कपास, ढांचा, मूंग, मूंगफली और लोबिया आदि प्रमुख फसलें हैं। इसके अतिरिक्त कुछ अन्य महत्वपूर्ण फसलों का भी उत्पादन भी खरीफ ऋतु के मौसम मे जाती है।

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